एक वोट की ताकत: आभासी संगोष्ठी में जागी लोकतांत्रिक चेतना
कोलकाता (पश्चिम बंगाल): शब्दभूमि प्रकाशन एवं जागो टीवी के संयुक्त तत्वावधान में 13 अप्रैल को आयोजित एक महत्वपूर्ण आभासी संगोष्ठी में मतदान के महत्व को लेकर व्यापक चर्चा की गई, जिसमें इसे केवल अधिकार नहीं बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोकतंत्र की मजबूती में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था, खासकर युवाओं और शिक्षित वर्ग को मतदान के प्रति जागरूक करना इस पहल का केंद्र रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत भावनात्मक पंक्तियों “लम्हों ने ख़ता की थी, सदियों ने सज़ा पाई…” से हुई, जिसने पूरे विमर्श को गंभीरता और संवेदनशीलता प्रदान की। वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन इसकी वास्तविक शक्ति तभी कायम रहती है जब नागरिक सक्रिय रूप से मतदान प्रक्रिया में भाग लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदान केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि देश के प्रति हर नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
संगोष्ठी में 1946 के सियालकोट जनमत संग्रह का उदाहरण देते हुए यह बताया गया कि बड़ी संख्या में लोगों के मतदान से दूर रहने के कारण इतिहास की दिशा बदल गई थी। इस संदर्भ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि छोटी-सी लापरवाही भी दूरगामी परिणाम ला सकती है। वक्ताओं ने शहरी और शिक्षित वर्ग की कम मतदान भागीदारी पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि नागरिक स्वयं निर्णय नहीं लेते, तो उनके लिए निर्णय कोई और ले लेता है, जो लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि मतदान किसी व्यक्ति या दल विशेष के समर्थन का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाने का माध्यम है। सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें, चाहे उनका समर्थन किसी भी पक्ष में क्यों न हो।
इस अवसर पर अंजू मनोत, डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी, केयूर मजूमदार, अल्पना सिंह, सुशील कुमार पाण्डेय, रचना सरन, सुरेंद्र सिंह (कोलकाता), डॉ. रुचि पालीवाल (उदयपुर), आशीष अंबर (दरभंगा), किरण कुमारी (भागलपुर) तथा डॉ. सुषमा हंस (रानी बिरला गर्ल्स कॉलेज) सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन प्रिया श्रीवास्तव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विनोद यादव द्वारा प्रस्तुत किया गया।
संगोष्ठी का निष्कर्ष स्पष्ट रहा कि एक वोट केवल संख्या नहीं, बल्कि देश के भविष्य को दिशा देने वाला निर्णायक माध्यम है।
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