सिलीगुड़ी साहित्य महोत्सव 2026: समावेशी संस्कृति और वैचारिक विमर्श का संगम
सिलीगुड़ी, 24 मार्च 2026
सिलीगुड़ी साहित्य महोत्सव 2026 में इस वर्ष समावेशी संस्कृति, भाषाई विविधता और समकालीन बौद्धिक विमर्श की अनूठी झलक देखने को मिली। सिलीगुड़ी साहित्यिक संस्था द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में विभिन्न पृष्ठभूमि से आए साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
इस अवसर पर प्रो. नंदिनी साहू, जो हिंदी विश्वविद्यालय (हावड़ा, पश्चिम बंगाल) की कुलपति हैं, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने आधुनिक समय की जटिल चुनौतियों—विशेषकर तकनीक, नैतिकता और मानविकी के अंतर्संबंध—पर गंभीर विचार प्रस्तुत किए। अपने संबोधन में उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग और दुरुपयोग पर प्रकाश डालते हुए ‘डिजिटल मानविकी’ और ‘उत्तर-सत्य’ के दौर में ज्ञान की शुद्धता और शैक्षणिक ईमानदारी बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की समानता, समकालीन साहित्य की दिशा और युवा पीढ़ी की भूमिका पर भी विस्तृत चर्चा हुई। महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी सोच रही, जहां विभिन्न भाषाओं, पीढ़ियों और क्षेत्रों के प्रतिभागियों को समान मंच प्रदान किया गया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया और साहित्य-संस्कृति के प्रति उनकी प्रारंभिक रुचि को भी दर्शाया।
समारोह में प्रसिद्ध विदुषी संयुक्ता दासगुप्ता ने प्रो. साहू को सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रो. साहू ने अपना चर्चित कविता संग्रह मेडूसा आयोजक सुब्रत दत्ता को भेंट किया, जिसकी सराहना की गई।
महोत्सव में भारत की भाषाई विविधता का भी प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला, जहां आठ भाषाओं को मंच मिला। इनमें विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी टोटो भाषा ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। प्रो. साहू ने इस भाषा पर भविष्य में शोध करने की इच्छा भी व्यक्त की।
इस सफल आयोजन के लिए सुब्रत दत्ता और डॉ. सुदीप्तो चटर्जी विशेष रूप से बधाई के पात्र रहे, जिन्होंने साहित्य, रचनात्मकता और समाज को एक मंच पर लाने का सराहनीय प्रयास किया। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।

