स्त्री शक्ति संगठन की गोष्ठी में “गुप्त रोग एवं महिलाएं” विषय पर मंथन
नई दिल्ली: संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी: स्त्री शक्ति संगठन द्वारा आयोजित ‘अपनी बात’ कार्यक्रम के अंतर्गत “गुप्त रोग एवं महिलाएं” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नीतू नागर, वंदना राजोरिया, पूनम, ज्योति, प्रेरणा बुड़ाकोटी, अंजना गर्ग, माला, सुधा, नीलम मिश्रा, रूबी, जय बाला निगम, अंजू, अर्चना कोचर, अधिवक्ता शशि सहित अन्य महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने विचार रखे। गोष्ठी का उद्देश्य महिलाओं के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं व्यवस्थागत गुप्त रोगों की पहचान कर उनके समाधान पर गंभीर चर्चा करना रहा।
वक्ताओं ने कहा कि गुप्त रोग किसी भी बड़े रोग से अधिक घातक सिद्ध हो सकते हैं, क्योंकि समय रहते पहचान न होने पर वे संक्रमण से महामारी का रूप ले सकते हैं। आज शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा हो जो किसी न किसी रूप में इन समस्याओं से प्रभावित न हो। शरीर, मन, समाज और व्यवस्था—चारों स्तरों पर व्याप्त इन रोगों की समय पर पहचान और उपचार आवश्यक है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से महिलाओं के संदर्भ में चर्चा करते हुए स्पष्ट किया गया कि मासिक धर्म चक्र, प्रजनन प्रक्रिया एवं लैंगिक क्रियाएं सामान्य एवं प्राकृतिक प्रक्रियाएं हैं, जिन्हें गुप्त रोग की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। यदि इन्हें अनावश्यक रूप से गुप्त रखा जाए तो यही झिझक आगे चलकर अन्य समस्याओं और रोगों का कारण बन सकती है। वक्ताओं ने जोर दिया कि स्वयं को और अपने बच्चों को इन विषयों के प्रति सहज, जागरूक और अद्यतन रखना समय की मांग है।
गोष्ठी में यह भी रेखांकित किया गया कि महिलाओं को समाज और व्यवस्था से मिलने वाले संक्रामक एवं मानसिक दबावों की पहचान करना उतना ही आवश्यक है जितना शारीरिक रोगों का उपचार। रोगी पर टिप्पणी करने के बजाय रोग पर काम करना ही वास्तविक समाधान है। ‘अपनी बात’ कार्यक्रम ने महिलाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक विमर्श को नई दिशा देते हुए यह संदेश दिया कि गुप्त रोगों पर खुलकर संवाद और समाधान की पहल ही स्वस्थ समाज की मजबूत नींव है।

