मांझी प्रखंड में विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन पर कार्यशाला, मजदूरों को मिलेंगे 125 दिन का रोजगार
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी प्रखंड मुख्यालय स्थित मनरेगा कार्यालय में कार्यक्रम पदाधिकारी पंकज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक दिवसीय बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 में निहित जनोपयोगी प्रावधानों की जानकारी आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधियों, आम लोगों एवं उपस्थित कर्मियों को योजना के क्रियान्वयन, इसकी विशेषताओं तथा लाभार्थियों की श्रेणियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यशाला में बताया गया कि अब तक मनरेगा के अंतर्गत प्रत्येक जॉब कार्डधारी मजदूर को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान था, जिसे विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत बढ़ाकर 125 कार्य दिवस कर दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को अधिक दिनों तक रोजगार मिलने का रास्ता साफ होगा और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।
भुगतान प्रक्रिया में हुए बदलाव की जानकारी देते हुए बताया गया कि पहले 15 दिन का मास्टर रोल निकालने के बाद आठवें दिन मजदूरी का भुगतान किया जाता था, जबकि अब सात दिन का मास्टर रोल निकालने के बाद आठवें दिन भुगतान किया जाएगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि मजदूरों को अब 15 दिन के भीतर ही उनकी मजदूरी की राशि सीधे उनके खाते में प्राप्त हो जाएगी, जिससे भुगतान में होने वाली देरी की समस्या काफी हद तक दूर होगी।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि मनरेगा की तुलना में वीबी-जी-आरएएम-जी योजना के कार्यक्षेत्र को और अधिक विस्तृत किया गया है। इसे आजीविका मिशन से भी जोड़ा गया है, ताकि ग्रामीण परिवारों को केवल मजदूरी ही नहीं बल्कि स्वरोजगार और स्थायी आजीविका के अवसर भी मिल सकें। अधिकारियों ने इसे ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने योजना को लेकर रुचि दिखाई और इसे गांवों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर दिया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि योजना का सही और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को इसका लाभ मिल सके।

