नगर पंचायत मांझी के ऐतिहासिक सतनही पोखरा के अस्तित्व पर संकट, बदहाली से चिंतित लोग
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी नगर पंचायत क्षेत्र का ऐतिहासिक सतनही पोखरा आज अपने अस्तित्व के गंभीर संकट से जूझ रहा है। कभी मत्स्य पालन और सरकारी राजस्व का बड़ा स्रोत रहा यह पोखरा अब कूड़ा-कचरे, गंदगी और अतिक्रमण के कारण बदहाली के कगार पर पहुंच चुका है। पोखरे में चारों ओर कचरे का अंबार लगा हुआ है और झाड़ियों की भरमार ने इसके प्राकृतिक स्वरूप को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। लंबे समय से सफाई नहीं होने और प्रशासनिक उदासीनता के कारण पोखरे का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे मछली पालन भी असंभव हो गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सतनही पोखरा का नाम सात छोटे-बड़े पोखरों को जोड़कर बने होने के कारण पड़ा था। एक समय था जब यहां मत्स्य विभाग के कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी रहती थी और मछली पालन-पोषण के साथ-साथ विभिन्न प्रजातियों के मछली बीज की बिक्री भी की जाती थी, जिससे सरकारी राजस्व को अच्छा मुनाफा होता था। लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपेक्षा के चलते यह व्यवस्था धीरे-धीरे बंद हो गई और उसके बाद पोखरे की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
लोगों का कहना है कि मत्स्य पालन बंद होने के बाद पोखरे पर अतिक्रमण का सिलसिला शुरू हो गया, जो आज तक जारी है। प्रशासन द्वारा कई बार अतिक्रमणकारियों को नोटिस देकर औपचारिकताएं तो पूरी की गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सफल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप पोखरे का मूल स्वरूप मिटने के कगार पर पहुंच गया है और भविष्य में इसके पूरी तरह समाप्त होने की आशंका जताई जा रही है।
इस संबंध में नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाएगा, ताकि ऐतिहासिक सतनही पोखरा को बचाया जा सके और इसे फिर से जनहित एवं राजस्व के उपयोग में लाया जा सके।

