IPS प्रकरण के बाद सख्ती, पुलिस पर मुकदमे से पहले सरकार की हरी झंडी जरूरी
बिहार में पुलिस अधिकारियों पर अभियोजन से पहले राज्य सरकार की मंजूरी अनिवार्य
पटना (बिहार) | धर्मेंद्र रस्तोगी
बिहार सरकार ने राज्य में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। गृह विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार अब किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मी पर मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
यह निर्णय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। संशोधित प्रावधान के अनुसार, जहां पहले “केंद्र सरकार” को अनुमति देने का अधिकार था, वहीं अब राज्य से संबंधित मामलों में यह अधिकार “राज्य सरकार” को प्रदान किया गया है। अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य में पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की प्रक्रिया सीधे तौर पर राज्य सरकार की स्वीकृति के अधीन हो जाएगी।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में एक आईपीएस अधिकारी को गिरफ्तार करने के प्रयास से जुड़ी घटनाओं के बाद कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही थी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पुलिस कर्मियों को कर्तव्य निर्वहन के दौरान कानूनी संरक्षण मिलेगा, साथ ही अभियोजन की प्रक्रिया में संस्थागत संतुलन भी बना रहेगा।
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी जांच एजेंसी या शिकायतकर्ता को पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने अथवा अभियोजन स्वीकृति से पूर्व राज्य सरकार से औपचारिक अनुमति प्राप्त करनी होगी। इससे एक ओर जहां पुलिस बल का मनोबल बनाए रखने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करने का प्रयास भी है कि वैधानिक प्रक्रिया का पालन सुव्यवस्थित ढंग से हो।

