सेना, साहित्य और स्मृतियों का संगम: प्लाटून कमांडर विंग को समर्पित काव्य संग्रह ‘स्मृतियों का सिपाही’ का भव्य लोकार्पण
दिल्ली: दिल्ली से प्रकाशित इस प्रेरक साहित्यिक समाचार में भारतीय सेना की परंपरा, अनुशासन और संवेदनशीलता का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब सुबेदार नफे सिंह योगी मालड़ा द्वारा रचित काव्य संग्रह “स्मृतियों का सिपाही” का भव्य लोकार्पण संपन्न हुआ। यह लोकार्पण समारोह प्लाटून कमांडर कोर्स–290 के सफल समापन अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय सेना के जूनियर लीडर विंग के अधिकारी, द्रोणाचार्य और प्रशिक्षु जवान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सुबेदार नफे सिंह योगी मालड़ा, प्लाटून कमांडर विंग (11 कुमाऊं), जिला महेंद्रगढ़ (हरियाणा) निवासी हैं और उन्होंने अपनी इस नवीनतम काव्य कृति को पूरे “प्लाटून कमांडर विंग परिवार” को समर्पित किया है। यह तथ्य इस लोकार्पण को और भी विशेष बनाता है कि जिस परिवार को पुस्तक समर्पित की गई, उसी परिवार के साथ इसका विमोचन भी किया गया। पुस्तक का लोकार्पण जूनियर लीडर विंग कमांडर मेजर जनरल राकेश मनोचा (सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल) के कर-कमलों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर साहित्यिक गुरु डॉ. मनोज भारत, प्लाटून कमांडर विंग के समस्त अधिकारीगण, द्रोणाचार्य तथा भारतीय सेना के जूनियर लीडर उपस्थित रहे। समारोह ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय सेना केवल युद्ध कौशल ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी सुबेदार नफे सिंह योगी मालड़ा द्वारा “पीसी विंग बैटल किंग” गान प्लाटून कमांडर विंग को समर्पित किया जा चुका है, जिसे एक ऐतिहासिक स्मृति के रूप में एकलव्य मैस की गैलरी वॉल पर स्थान मिला है। वे अपनी प्रत्येक साहित्यिक उपलब्धि का श्रेय अपने वरिष्ठ अधिकारियों, द्रोणाचार्यों और सकारात्मक सैन्य वातावरण को देते हैं, जिसने उन्हें निरंतर रचनात्मक ऊर्जा प्रदान की।
साहित्यिक दृष्टि से देखें तो सुबेदार नफे सिंह योगी मालड़ा अब तक कुल 30 पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। इनमें 11 एकल काव्य संग्रह शामिल हैं, जिनमें देश की बात (2017) से लेकर स्मृतियों का सिपाही (2026) तक की रचनाएँ सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त, 19 साझा संकलनों में काव्य, कहानी, लघुकथा और संस्मरण विधाओं में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। विगत 25 वर्षों से उनकी रचनाएँ देश की प्रमुख हिंदी पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं।
अपने माता-पिता, गुरुजनों, परिवार, शुभचिंतकों और अपने गाँव की मिट्टी तक को नमन करते हुए सुबेदार नफे सिंह कहते हैं कि यदि माँ सरस्वती का आशीर्वाद इसी प्रकार बना रहा, तो वे आजीवन साहित्य सृजन के माध्यम से माँ भारती की सेवा करते रहेंगे। यह आयोजन न केवल एक पुस्तक विमोचन था, बल्कि सेना और साहित्य के बीच भावनात्मक सेतु का सशक्त उदाहरण भी बना।

