सारण: प्रसिद्ध कलाकार ओम प्रकाश चौधरी का हार्ट अटैक से निधन, पंडाल कला जगत को अपूरणीय क्षति
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: सारण जिले के चर्चित चित्रकार, पंडाल निर्माता एवं मांझी प्रखंड के धनी छपरा गांव निवासी प्रख्यात कलाकार ओम प्रकाश चौधरी (50 वर्ष) का शुक्रवार की देर रात हार्ट अटैक से छपरा सदर अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार सुबह सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना फैलते ही उनके दरवाजे पर आसपास के ग्रामीणों, कारीगरों और शुभचिंतकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
स्थानीय लोगों और परिजनों ने बताया कि ओम प्रकाश चौधरी अपनी अद्भुत चित्रकारी और पंडाल निर्माण कला के लिए पूरे जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी प्रसिद्ध थे। उनके छोटे भाई पंकज चौधरी और सहयोगी मिथिलेश पंडित ने बताया कि बनियापुर के मानोपाली में 25 लाख रुपये की लागत से बनाया गया करीब 200 फुट लंबा अजगरनुमा पंडाल, जलालपुर के फुटानी बाजार में 75 लाख रुपये की लागत से निर्मित ऑक्टोपस आकृति का पंडाल और बनियापुर में 40 लाख रुपये की लागत से बना ‘मिशन सिंदूर’ पहाड़ी स्वरूप का पंडाल काफी चर्चा में रहा था। इसके अलावा धनी छपरा गांव के सामने पिछले वर्ष अयोध्या के राम मंदिर की आकृति पर आधारित पंडाल ने भी लोगों का ध्यान खींचा था।
कौरुधौरु पंचायत के मुखिया पति उदय शंकर सिंह ने बताया कि 22 जनवरी को नैनी फकुली में प्रस्तावित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रम के लिए की जा रही पेंटिंग और कलाकृति का कार्य अंतिम चरण में था, लेकिन ओम प्रकाश चौधरी के असामयिक निधन से वह अधूरा रह गया। वहीं धनी छपरा गांव के राम जानकी मंदिर परिसर में ‘दो हंसों का जोड़ा’ नामक आकर्षक पंडाल का निर्माण भी उनके निधन के कारण पूरा नहीं हो सका, जिसे लेकर गांव के लोग गहरे दुःख में हैं।
दाह संस्कार में मानोपाली से राजीव कुमार, मियां पट्टी से बिनोद कुमार गुप्ता, जलालपुर के फुटानी बाजार, नैनी सहित कई स्थानों से बड़ी संख्या में कलाकार, कारीगर और शुभचिंतक पहुंचे। सभी ने एक स्वर में कहा कि शांत स्वभाव और अद्वितीय प्रतिभा के धनी ओम प्रकाश चौधरी का जाना कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
परिजनों ने बताया कि मृतक अपने पीछे पत्नी और तीन अविवाहित पुत्र छोड़ गए हैं, जिनका पालन-पोषण उनकी कारीगरी और कलाकृति से होने वाली आमदनी से होता था। सरयू नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ, जहां उनके ज्येष्ठ पुत्र मोनू कुमार ने मुखाग्नि दी। पूरे क्षेत्र में इस असमय निधन को लेकर शोक और संवेदना का माहौल बना हुआ है।

