मां सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत की आभासी काव्य–विचार गोष्ठी में ‘सहयोग’ विषय पर सार्थक विमर्श
नई दिल्ली: संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी: मां सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत द्वारा रविवार को एक आभासी काव्य एवं विचार गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “सहयोग किसे कहते हैं?” रखा गया था, जिसमें देशभर के साहित्यकारों ने सहभागिता कर अपने विचार और काव्य प्रस्तुत किए। इस गोष्ठी का आयोजन मंच के संस्थापक श्री महेश प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में किया गया, जबकि मंच संचालन की जिम्मेदारी श्री महेश शर्मा एवं निहारिका ने संयुक्त रूप से निभाई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माला ने अध्यक्षीय उद्बोधन में सहयोग को सामाजिक समरसता की आधारशिला बताया। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ऋषिका वर्मा ने सहयोग विषय पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि समाज मनुष्यों का ऐसा समूह है, जहां प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे पर निर्भर होता है। कोई भी व्यक्ति अकेले अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकता, और इसी आपसी निर्भरता से सहयोग की भावना जन्म लेती है।
डॉ. ऋषिका वर्मा ने कहा कि सहयोग की भावना समाज को जोड़ती है, लोगों को संवेदनशील बनाती है और सामाजिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में मदद करती है। सहयोग के अभाव में समाज स्वार्थ, संघर्ष और अव्यवस्था का शिकार हो सकता है, जबकि सहयोग से आपसी विश्वास बढ़ता है, जो किसी भी स्वस्थ समाज की नींव होता है। उन्होंने अपने विचारों को कविता के माध्यम से भी प्रस्तुत किया, जिसमें सहयोग को जीवन को जोड़ने वाली डोर बताया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य साहित्यकारों ने भी अपने-अपने विचार और रचनाएं प्रस्तुत कर गोष्ठी को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बनाया। अंत में मंच के संस्थापक श्री महेश प्रसाद शर्मा एवं अन्य सहयोगी सदस्यों ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों की निरंतरता की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

