पुण्यतिथि विशेष-
जेपी की आखिरी उड़ान...हेलीकॉप्टर से दो चक्कर लगाया अपना गांव, फिर कभी नहीं लौटे लोकनायक
1978 में सिताबदियारा आए थे जयप्रकाश नारायण, विदाई के वक्त उमड़ा था पूरा गांव; एक साल बाद निधन की खबर पहुंची तो फूट पड़ा था सिताबदियारा
✍️ धर्मेंद्र रस्तोगी
छपरा, 08 अक्टूबर 2026
आसमान में हेलीकॉप्टर के दो चक्कर.....नीचे उमड़ा पूरा गांव...हर ओर गूंजता 'लोकनायक जिंदाबाद' का नारा और अपनों को निहारतीं जेपी की आंखें। 07 सितंबर 1978 का वह दिन सिताब दियारा के लिए आज भी एक जीवंत स्मृति है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण अपने गांव की धरती पर आखिरी बार आए थे। तीन दिन रहने के बाद जब विदा हुए तो शायद किसी को नहीं मालूम था कि यह अपने गांव से उनकी अंतिम मुलाकात है। हेलीकॉप्टर आसमान में ओझल हुआ और जेपी फिर कभी सिताबदियारा नहीं लौटे।
गांव की गलियों में आज भी जिंदा है आखिरी मुलाकात का किस्सा:
सिताब दियारा के बुजुर्ग जैनेंद्र कुमार सिंह और श्रीराम यादव बताते हैं कि जेपी 07 सितंबर को अपने घर पहुंचे थे। तीन दिनों तक गांव में रहे। उनके आने की खबर मिलते ही लोग उन्हें देखने के लिए जुटते रहे। किसी के लिए वह देश के महान नेता थे तो किसी के लिए गांव के अपने जेपी। दलजीत टोला निवासी आनंद बिहारी सिंह को जेपी के साथ हुई एक मुलाकात आज भी याद है। शाम के समय जेपी आंगन में बैठे थे। घर के पिछले दरवाजे से गांव की कई महिलाएं उन्हें देखने पहुंचीं। पैर छूने की कोशिश पर जेपी ने भोजपुरी में कहा, 'आपलोगन के हमार पैर ना छुए के चाही।' तभी एक बुजुर्ग महिला ने सहजता से कहा, 'राउर इ नातिन पतोह लगिहें।' जेपी मुस्कराए और बोले, 'अच्छा, ठीक वा।' इसके बाद महिलाएं देर तक उनका आशीर्वाद लेती रहीं।
'चंद्रशेखर, तनी हमार गांव दिखा द...'
तीसरे दिन विदाई की घड़ी आई। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर उस समय उनके साथ थे। जेपी ने उनसे कहा, 'चंद्रशेखर, तनी हमार गांव दिखा द।' इसके बाद दोनों हेलीकॉप्टर से निकले। हेलीकॉप्टर ने सिताब दियारा के ऊपर दो चक्कर लगाए। नीचे खड़ी भीड़ हाथ हिलाती रही। नारों से गांव गूंजता रहा। हेलीकॉप्टर नीचे उतरा तो जेपी कुछ देर खड़े होकर अपने गांव को निहारते रहे। लोगों की आंखें नम थीं। कुछ ही देर बाद हेलीकॉप्टर फिर उड़ा और जेपी की वह आखिरी उड़ान बन गई। उसके बाद वह कभी सिताबदियारा नहीं आए।
निधन की खबर आई तो रो पड़ा था पूरा गांव:
08 अक्टूबर 1979। जेपी के निधन की खबर जब सिताब दियारा पहुंची तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। लोग उनके घर की ओर दौड़ पड़े। कई ग्रामीण उसी समय पटना के लिए निकल गए, ताकि अपने लोकनायक को अंतिम विदाई दे सकें। जिस गांव ने उन्हें जन्म लेते देखा था, उसी गांव ने एक साल पहले उनकी आखिरी विदाई भी देखी थी।
आज पुण्यतिथि पर सिताब दियारा में जेपी की स्मृतियां फिर होंगी ताजा:
जेपी नारायण स्मारक प्रतिष्ठान के व्यवस्थापक अशोक सिंह के अनुसार, स्कूली बच्चे और ग्रामीण उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देंगे। लोकनायक की आवाज भले खामोश हो गई, लेकिन बिहार के सारण जिला और उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बीच सारण के रिविलगंज प्रखंड और थाना क्षेत्र के लाला टोला सिताब दियारा की मिट्टी में उनकी याद आज भी उसी तरह जिंदा है। एक ऐसे अपने की तरह, जो आखिरी बार आसमान से अपने गांव को देखकर गया था।
लोक नायक का जन्म 11 को जबकि 08 अक्टूबर को हुई थी मृत्यु:
लोक नायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड मुख्यालय से दक्षिण दियरा क्षेत्र के सिताब दियारा के लाला टोला में हुई थी। हालांकि बचपन में ही उनके गावं में प्लेग जैसी बीमारी फैलने और सरयू नदी में हुए कटाव के कारण उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की सीमा में जा बसे जो आज जयप्रकाश नगर के नाम से जाना जाता है। लेकिन उनकी मृत्यु 08 अक्टूबर 1979 को पटना में हुआ था। उनकी मृत्यु के बाद उनकी राजनितिक विचारधारा आज भी हमें यानि हम भारत के लोगो को प्रेरित करती है, हालांकि यह अलग बात है की उनके नाम प़र राजनीति करने वाले आज कहा से कहा पहुंच गए, लेकिन आज भी उनका गावं जितना विकसित होना चाहिए था, उतना हो नहीं पाया है।

