छपरा की शिक्षिका चंचला तिवारी का राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चयन: शिक्षा जगत में सारण का बढ़ा मान
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार के सारण जिले के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है, जब शिक्षा के क्षेत्र में निष्ठा, नवाचार और अटूट समर्पण की मिसाल पेश करने वाली छपरा सदर प्रखंड के बसाढ़ी स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक चंचला तिवारी को प्रतिष्ठित राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित होने वाले भव्य राज्यस्तरीय समारोह में उन्हें इस प्रख्यात सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। उनका यह चयन केवल एक शिक्षक की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह उन समस्त शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अपनी शिक्षण शैली से समाज में सकारात्मक बदलाव की बयार बहा रहे हैं।
चंचला तिवारी का शैक्षणिक सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक शिक्षक की भूमिका केवल विद्यालय की चारदीवारी और कक्षाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनका प्रभाव जिले, राज्य और संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ता है। उन्होंने अपने विद्यालय में न केवल पठन-पाठन के स्तर को सुधारा है, बल्कि एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी मार्गदर्शक के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनके कार्यकाल के दौरान विद्यालय में अनुशासन, शैक्षणिक गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अपने विद्यालय के दैनिक उत्तरदायित्वों से परे हटकर, चंचला तिवारी ने राज्य के शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी अत्यंत सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) में एक संसाधन व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की हैं। उनके माध्यम से तैयार किए गए शिक्षण तौर-तरीकों और मार्गदर्शिकाओं का लाभ राज्यभर के शिक्षकों को मिला है। इसके साथ ही, उन्होंने शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (CTE), सारण में भी संसाधन व्यक्ति के रूप में अपनी दक्षता का परिचय दिया है। विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों के दौरान उन्होंने शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, बाल-केंद्रित शिक्षा पद्धतियों और कक्षा प्रबंधन के गुर सिखाए हैं, जिससे शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आज के इस डिजिटल युग में शिक्षा की रूपरेखा तेजी से बदल रही है। इस बदलाव को समय रहते पहचानते हुए चंचला तिवारी ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है। वे सारण जिले की ‘गुरु डिजिटल क्लासेज’ की नोडल शिक्षिका के रूप में कार्य कर चुकी हैं। इस विशिष्ट भूमिका के तहत उन्होंने तकनीक आधारित शिक्षण सामग्री के निर्माण, ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन और डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग को लेकर सराहनीय प्रयास किए। उनके इन प्रयासों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच डिजिटल विभाजन को पाटने में मदद की है, जिससे दूर-दराज के छात्र-छात्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुगमता से पहुंच सकी है।
प्रशासनिक और नेतृत्व कौशल के स्तर पर भी उनका योगदान अनुकरणीय रहा है। चंचला तिवारी ने राज्य के अन्य प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के मार्गदर्शन के लिए एक विशेष हैंडबुक विकसित करने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। इस मार्गदर्शिका का मुख्य उद्देश्य विद्यालय के प्रशासनिक कार्यों, वित्तीय प्रबंधन, शैक्षिक योजनाओं के क्रियान्वयन और अभिलेख संधारण को सरल बनाना था, ताकि हर प्रधानाध्यापक अपने विद्यालय का संचालन सुचारू रूप से कर सके। इसके अतिरिक्त, बिहार सरकार द्वारा संचालित मॉडल स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल के विकास में भी उनकी सक्रिय सहभागिता रही है। विद्यालय नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता और अकादमिक मॉनिटरिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित इन मॉड्यूल्स ने राज्यभर के नेतृत्वकर्ताओं को नई दिशा प्रदान की है।
विद्यालय के सहायक शिक्षक कुमार मृणाभ के अनुसार, चंचला तिवारी का यह चयन उनके वर्षों के निरंतर परिश्रम, नवाचार और अटूट लगन का प्रतिफल है। उनके नेतृत्व में विद्यालय में एक ऐसा सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है, जहां छात्र सीखने के लिए पूरी तरह प्रेरित होते हैं और शिक्षक अपने पेशेवर विकास के प्रति जागरूक रहते हैं। उनकी कार्यशैली में छात्रों के प्रति प्रेम, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और शिक्षा के प्रति समर्पण का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है।
राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए उनके चयन से सारण जिले के संपूर्ण शिक्षा जगत में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल है। जिला प्रशासन से लेकर स्थानीय बुद्धिजीवियों और शिक्षा प्रेमियों ने उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। यह सम्मान इस सत्य को पुन: स्थापित करता है कि यदि कोई शिक्षक ईमानदारी और नवीन सोच के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे, तो वह समाज में एक गहरी और सकारात्मक रेखा खींच सकता है। शिक्षक दिवस पर पटना के मंच से मिलने वाला यह राजकीय सम्मान उनकी वर्षों की तपस्या और शैक्षिक उत्कृष्टता को मिलने वाली सच्ची और सार्थक पहचान है, जो आने वाली कई पीढ़ियों के शिक्षकों को प्रेरित करती रहेगी।

