सारण में 252 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पेयजल, 225 में शौचालय तो 447 केंद्र बिजली से वंचित
डीडीसी ने लंबित कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश, 420 नए भवन निर्माण का भी लक्ष्य
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सारण जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और महिलाओं को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) लक्ष्मण तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में पेयजल, शौचालय, विद्युत व्यवस्था और लंबित भवन निर्माण कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। डीडीसी ने संबंधित अधिकारियों को सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने का निर्देश दिया।
बैठक में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस), सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
4,638 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत, 1,024 सरकारी भवनों में संचालित
समीक्षा में सामने आया कि सारण जिले में कुल 4,638 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। इनमें 656 केंद्र आईसीडीएस के अपने भवनों में तथा 368 केंद्र अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं। यानी कुल 1,024 केंद्र सरकारी परिसरों में चल रहे हैं।
वहीं, मूलभूत सुविधाओं की स्थिति में अभी कई कमियां सामने आई हैं। जिले के 252 केंद्रों पर पेयजल, 225 केंद्रों पर शौचालय और 553 केंद्रों पर विद्युत सुविधा उपलब्ध नहीं होने की जानकारी बैठक में दी गई।
205 केंद्रों में चापाकल मरम्मत लंबित
पेयजल व्यवस्था की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 205 आंगनबाड़ी केंद्रों में चापाकल की मरम्मत के लिए परियोजनावार विवरण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (PHED) को भेजा गया है। इनमें सिर्फ 29 केंद्रों पर कार्य पूरा हुआ है, जबकि 176 केंद्रों पर काम लंबित है।
कार्य की धीमी गति पर डीडीसी ने नाराजगी जताई और संबंधित विभाग को शेष कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश दिया।
शौचालय निर्माण में भी कई काम अधूरे
आईसीडीएस के अपने भवन वाले केंद्रों में से 154 केंद्रों पर शौचालय निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 46 केंद्रों पर कार्य प्रगति पर है अथवा लंबित है।
इसके अतिरिक्त 15वें वित्त आयोग के यूनाइटेड ग्रांट मद से 200 आंगनबाड़ी केंद्रों में नए शौचालय बनाने का लक्ष्य है। इनमें 106 केंद्रों के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा राशि आवंटित की जानी है। इस मद में अब तक 9 केंद्रों पर निर्माण पूरा हुआ है, जबकि 97 केंद्रों का कार्य लंबित है।
447 केंद्रों को अब भी स्थायी बिजली कनेक्शन का इंतजार
विद्युत व्यवस्था की समीक्षा में बताया गया कि जिले के 4,638 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 4,191 केंद्रों में स्थायी विद्युत कनेक्शन उपलब्ध है। वहीं 447 केंद्र अभी भी स्थायी बिजली कनेक्शन से वंचित हैं।
डीडीसी ने बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ शेष केंद्रों में जल्द विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
420 नए भवनों के निर्माण का लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2024-25 के तहत जिले में 420 नए आंगनबाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 524 स्थलों का भूमि विवरण एनओसी के लिए संबंधित अंचलाधिकारियों को भेजा गया है।
इनमें 208 स्थलों पर एनओसी प्राप्त हो चुकी है, जबकि 70 स्थलों के प्रस्ताव अस्वीकृत किए गए हैं। वहीं 246 स्थलों पर एनओसी लंबित है।
122 केंद्रों को स्कूलों में किया जाना है स्थानांतरित
किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी विद्यालयों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा हुई। जिले में परियोजनावार प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों की संख्या 2,407 है। वर्तमान में 455 आंगनबाड़ी केंद्र विद्यालय के कमरों में संचालित हो रहे हैं, जबकि 122 केंद्रों को अभी विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाना है।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं: डीडीसी
बैठक के अंत में डीडीसी लक्ष्मण तिवारी ने डीपीओ, सभी सीडीपीओ और जिला शिक्षा पदाधिकारी को आपसी समन्वय के साथ लंबित मामलों का त्वरित समाधान करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों और गर्भवती महिलाओं समेत लक्षित लाभुकों को समय पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से धरातल तक पहुंचे।
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