सनातन सम्मान की हुंकार से गूंजा बक्सर, हिंदू राष्ट्र के संकल्प के साथ नेतृत्व पर भी उठे सवाल
सनातन गौरव सम्मेलन में जुटे महिला-पुरुष, विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने शिक्षा, स्वास्थ्य और आरक्षण की राजनीति पर साधा निशाना
बक्सर (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: ऐतिहासिक किला मैदान में रविवार को आयोजित सनातन गौरव सम्मेलन में सनातन आस्था, संस्कृति और राजनीतिक विमर्श का संगम देखने को मिला। विश्वामित्र सेना के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुए कार्यक्रम के दौरान किला मैदान सनातन संस्कृति, धर्म, सामाजिक एकजुटता और हिंदू राष्ट्र के संकल्प से जुड़े नारों से गूंजता रहा।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने हिंदू धर्म और आस्था के सम्मान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश में किसी भी धर्म या आस्था के अपमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता। राष्ट्र निर्माण में सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है, लेकिन हिंदू समाज के सम्मान और अधिकारों की अनदेखी भी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
जाति और आरक्षण की राजनीति पर उठाए सवाल
राजकुमार चौबे ने जाति और आरक्षण की राजनीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाज को जातीय आधार पर बांटने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्र की नींव बेहतर शिक्षा और संस्कार से तैयार होती है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना भी जरूरी है।
बक्सर के नेतृत्व को लेकर भी दिया संदेश
राजकुमार चौबे ने बक्सर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महर्षि विश्वामित्र की धरती है। ऐसे क्षेत्र को ऐसा नेतृत्व चाहिए, जो यहां की मिट्टी, संस्कृति और लोगों की भावनाओं को समझे तथा स्थानीय विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाए।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बक्सर की पहचान और नेतृत्व का फैसला केवल बाहरी चमक-दमक के आधार पर नहीं होना चाहिए। जनता को क्षेत्र के हित, स्थानीय समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर अपना निर्णय लेना चाहिए।
धार्मिक आयोजन से राजनीतिक विमर्श तक
सम्मेलन में सनातन एकता, संस्कृति के संरक्षण और हिंदू राष्ट्र के संकल्प पर विशेष जोर दिया गया। हालांकि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन के रूप में शुरू हुए इस सम्मेलन में शिक्षा, स्वास्थ्य, आरक्षण, सामाजिक एकता और बक्सर के नेतृत्व जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
किला मैदान से उठे इन राजनीतिक और सामाजिक संदेशों ने बक्सर में आने वाले दिनों के संभावित राजनीतिक विमर्श को लेकर भी चर्चा को तेज कर दिया है।

