भोजपुरी चित्रकला को स्कूली पाठ्यक्रम और बच्चों की गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत: सांसद
सारण संग्रहालय में तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न, बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे चित्रकारों ने कैनवास पर उकेरी लोकसंस्कृति की छवि
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: भोजपुरी क्षेत्र की समृद्ध लेकिन विलुप्त होती चित्रकला परंपरा को संरक्षित करने और नई पीढ़ी से जोड़ने की जरूरत है। इसके लिए स्कूली बच्चों को भोजपुरी चित्रकला से जोड़ना होगा। बच्चों को इस लोककला की जानकारी और प्रशिक्षण मिलने से सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उक्त बातें महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल ने सोमवार को सारण संग्रहालय में आयोजित भोजपुरी चित्रकला कार्यशाला के समापन समारोह में कहीं। छपरा पचमेल फाउंडेशन और पटना के आसरा सेवा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब दो दर्जन चित्रकारों ने हिस्सा लिया। कलाकारों ने कैनवास पर अपनी तूलिका के माध्यम से भोजपुरी समाज की लोकपरंपराओं, संस्कृति और जीवनशैली को चित्रों के रूप में उकेरा। कार्यशाला के समापन पर तैयार चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
प्रदर्शनी का उद्घाटन सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल ने करने के बाद प्रदर्शनी में लगाए गए चित्रों का अवलोकन के दौरान कलाकारों से उनकी कलाकृतियों के विषय एवं शैली के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों के प्रयास की सराहना करते हुए भोजपुरी चित्रकला को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की आवश्यकता बताई।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए सीग्रीवाल ने कहा कि भोजपुरी क्षेत्र की विलुप्त हो रही चित्रकला संस्कृति को जीवंत रखने में कलाकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने के साथ ही नई पीढ़ी को इससे जोड़ना जरूरी है।
संस्था के निदेशक डॉ. पृथ्वीराज सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए भोजपुरी चित्रकला के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक सिन्हा ने कहा कि लोक संस्कृति से आम लोगों का जुड़ाव बढ़ाए बिना भोजपुरी चित्रकला जैसी लोक कलाओं का विकास संभव नहीं है। उन्होंने लोककलाओं के संरक्षण और उनके व्यापक प्रसार पर जोर दिया।समारोह में पद्मश्री श्याम शर्मा, कला समीक्षक सुनील कुमार, पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार सिंह, हरेन्द्र सिंह, ललित कुमार सिंह और अंजू सिंह सहित अन्य लोगों ने विचार रखे। संचालन डॉ. अमरेन्द्र सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शिवानुग्रह नारायण सिंह ने किया।

