साहित्यकारों ने श्रद्धा से मनाया राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्मदिवस, ऑनलाइन सम्मेलन में देशभर के कवियों ने अर्पित किए काव्य-पुष्प
नई दिल्ली: संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी: माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्यमंच भारत के बैनर तले राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्मदिवस देशभर के साहित्यकारों ने श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया। इस अवसर पर विभिन्न प्रांतों से जुड़े कवि-साहित्यकार ऑनलाइन सम्मेलन में शामिल हुए और राष्ट्रकवि के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा हिंदी साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें काव्य-पुष्प अर्पित किए।
कार्यक्रम का आयोजन माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्यमंच भारत के संस्थापक महेश प्रसाद शर्मा, बरेली (मध्य प्रदेश) के नेतृत्व में किया गया। आयोजन में ‘संस्था एक प्रयास भारत’ की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम का संयोजन रायपुर के डॉ. रतिराम गढ़ेवाल ने किया। दिल्ली की श्रीमती मीरा सक्सेना मुख्य अतिथि रहीं, जबकि श्रीमती उषा अग्रवाल, छतरपुर (मध्य प्रदेश) ने भी कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में सहभागिता की। डॉ. प्रमोद कुमार आदित्य ने समन्वयक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम में पुणे के डॉ. महेंद्र माणिक और दिल्ली की प्रेरणा बुढ़ाकोटी का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती बबिता यादव, गौतमबुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। डॉ. ज्योति कृष्ण मिश्र, पुणे (महाराष्ट्र) एवं श्रीमती उर्मिला साइप्रीत, कटनी (मध्य प्रदेश) ने मंच संचालन करते हुए देश के विभिन्न प्रांतों से जुड़े कवि-साहित्यकारों को क्रमशः आमंत्रित किया। साहित्यकारों ने अपने वक्तव्यों और काव्य रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को याद करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया।
वक्ताओं ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों को प्रभावशाली स्वर प्रदान किया। उनका साहित्य भारतीय समाज में राष्ट्रीय चेतना जगाने के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। आज भी उनकी रचनाएं नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और मानवीय संवेदनाओं की प्रेरणा देती हैं।
कार्यक्रम के संरक्षक महेंद्र माणिक, पुणे व्यस्तता के बावजूद कुछ समय के लिए ऑनलाइन आयोजन में उपस्थित हुए। देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कवि-साहित्यकारों ने अपने विचार और काव्य प्रस्तुत कर राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक जीवन को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
अंत में संस्थापक महेश प्रसाद शर्मा ने सभी अतिथियों, कवि-साहित्यकारों और आयोजन से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साहित्यिक गरिमा और राष्ट्रकवि के प्रति श्रद्धा से ओतप्रोत यह ऑनलाइन आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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