स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऑनलाइन काव्य गोष्ठी, देशभक्ति की कविताओं से गूंजा साहित्यिक मंच
नई दिल्ली: संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी: माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत एवं संस्था ‘एक प्रयास भारत’ के संयुक्त तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस के दूसरे दिन एक भव्य ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कवि-साहित्यकारों ने अपनी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से भारत माता के प्रति श्रद्धा, देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना व्यक्त की। ऑनलाइन आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से रचनाकारों की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम में माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत के संस्थापक पं. महेश प्रसाद शर्मा, बरेली (मध्य प्रदेश), संरक्षक महेंद्र ‘माणिक’, पुणे (महाराष्ट्र), मीरा सक्सेना ‘माध्वी’, नई दिल्ली तथा डॉ. ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी ‘शैलेश’, वाराणसी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रतिराम गढ़ेवाल ‘ज्ञान पिपासु’, रायपुर ने किया, जबकि समन्वयक के रूप में डॉ. प्रमोद आदित्य, जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़) और मीडिया प्रभारी डॉ. प्रेरणा बुड़ाकोटी, दिल्ली की गरिमामय सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की कवयित्री बबीता यादव द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। मंच संचालन पं. महेश प्रसाद शर्मा एवं डॉ. उर्मिला सांईंप्रीत, कटनी (मध्य प्रदेश) ने प्रभावी एवं सरस अंदाज में किया। इसके बाद देश के अमर शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों को काव्यांजलि अर्पित करते हुए रचनाकारों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, संस्कृति और गौरव से जुड़ी रचनाओं का पाठ किया।
डॉ. ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी ‘शैलेश’ ने शहीदों के बताए मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की। कमलेश विष्णु सिंह ने देशप्रेम से ओतप्रोत रचना के माध्यम से राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना व्यक्त की। विजयाबाला स्याल ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचना प्रस्तुत की, जबकि डॉ. श्वेता मिश्र, बेंगलुरु ने जागरूकता और कर्तव्यबोध का संदेश देती कविता सुनाई। नंदकुमार मिश्र ‘आदित्य’ ने भोजपुरी में रचना प्रस्तुत कर कार्यक्रम में क्षेत्रीय भाषा की मिठास घोली।
पुहूप राम यदु ने स्वतंत्रता दिवस और किसानों से जुड़े विषय पर अपनी रचना का वाचन किया। डॉ. रत्ना वर्मा ‘राज’, धनबाद ने राष्ट्र के गौरव को समर्पित कविता प्रस्तुत की। मंजू दलाल ‘मञ्जरी’, नई दिल्ली ने समसामयिक सामाजिक सरोकारों पर रचना सुनाई। डॉ. उषा अग्रवाल ‘जल किरण’ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित कविता का पाठ किया, जबकि डॉ. शशिकला अवस्थी, इंदौर ने क्रांतिकारी वीर शहीदों के योगदान का काव्यात्मक गुणगान किया।
महेंद्र ‘माणिक’ ने अपनी गंभीर रचना के माध्यम से स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ और समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति पर सवाल उठाए। मनीष शर्मा, देवास ने वीर शहीदों को समर्पित रचना प्रस्तुत की। राकेश कुमार पंवार ने तिरंगे को भारत की पहचान बताते हुए देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कविता सुनाई। डॉ. कृष्ण कुमार चंद्रा, बालको-कोरबा ने तिरंगे और भारत की गौरवगाथा पर प्रभावशाली काव्य पाठ किया। डॉ. प्रमोद कुमार आदित्य ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में गीत प्रस्तुत किया।
भोपाल के डॉ. अमित ने दोहे के माध्यम से देश की शान और जन-गण-मन की भावना को अभिव्यक्त किया। छत्तीसगढ़ के कवि दिनेश दुबे ने ओजपूर्ण गीत का वाचन कर श्रोताओं में राष्ट्रभक्ति का उत्साह जगाया। नीमच की कवयित्री सुनीता चौधरी ने स्वतंत्रता के महत्व और बच्चों में राष्ट्रप्रेम की शिक्षा पर अपनी रचना प्रस्तुत की।
गोष्ठी में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड, उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में डॉ. कृष्णा जोशी, नीरजा सिंह, डॉ. ऋचा शर्मा ‘श्रेष्ठा’, डॉ. अर्चना पाण्डेय, डॉ. अम्बे कुमारी, अविनाश खरे, डॉ. अनुराधा, प्रज्ञा आंबेरकर, संजय जैन ‘बीना’, अमित मालवीय ‘हर्ष’, डॉ. एस.पी. भारद्वाज सहित अनेक कवि एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं और विचारों से आयोजन को समृद्ध किया।
देशभक्ति से ओतप्रोत मौलिक कविताओं, गीतों, दोहों और विचारों ने ऑनलाइन काव्य गोष्ठी को साहित्यिक एवं राष्ट्रीय चेतना से भर दिया। विभिन्न प्रांतों के रचनाकारों को एक मंच पर जोड़ने वाले इस आयोजन ने न केवल स्वतंत्रता दिवस की भावना को जीवंत किया, बल्कि साहित्य के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, एकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। आयोजन के सफल समापन पर आयोजकों ने सभी रचनाकारों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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