जेपी विश्वविद्यालय में 'कुलपति खोजो अभियान', लापता कुलपति के पोस्टर लगाकर आरएसए का अनोखा विरोध प्रदर्शन
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: जयप्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) में प्रशासनिक कार्यों में कथित शिथिलता और छात्रों की लंबित समस्याओं को लेकर शुक्रवार को शोध विद्यार्थी संगठन (आरएसए) ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर, विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों और प्रमुख स्थानों पर "कुलपति खोजो अभियान" चलाते हुए "लापता कुलपति" के पोस्टर चस्पा किए तथा डंका बजाकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने लंबित कार्यों के शीघ्र निष्पादन और नियमित प्रशासनिक व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
आरएसए के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुलपति प्रो. (डॉ.) परमेन्द्र कुमार बाजपेई के पदभार ग्रहण करने के बाद से विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि कुलपति नियमित रूप से विश्वविद्यालय कार्यालय नहीं आते, जिसके कारण छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्य लंबित पड़े हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय का संचालन नियमित रूप से कार्यालय से होना चाहिए, ताकि छात्रों की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
संगठन ने आरोप लगाया कि हजारों छात्र-छात्राओं की मूल डिग्रियां कुलपति के हस्ताक्षर के अभाव में विश्वविद्यालय में लंबित हैं। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में नामांकन, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दूर-दराज से आने वाले छात्र बार-बार विश्वविद्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। आरएसए ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय बताया।
प्रदर्शन के दौरान संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं वित्तीय फाइलों का निष्पादन विश्वविद्यालय कार्यालय के बजाय आवास से किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। संगठन ने मांग की कि कुलपति प्रतिदिन विश्वविद्यालय कार्यालय में उपस्थित होकर लंबित डिग्रियों पर तत्काल हस्ताक्षर करें, शोधार्थियों एवं छात्रों के सभी लंबित कार्यों का शीघ्र निष्पादन कराएं तथा विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाएं।
आरएसए ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। इस अभियान में संयोजक अंकित कुमार सिंह, सह संयोजक विशाल सिंह बॉक्सर, उज्ज्वल कुमार सिंह, गुलशन यादव, विकास सिंह सेंगर, परमजीत सिंह कुशवाहा, परमेंद्र कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और छात्र कार्यकर्ता मौजूद रहे। समाचार लिखे जाने तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
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