दिनेश कुशवाह की कविताओं ने छपरा में जगाई मानवीय संवेदना की लौ, प्रेम और सामाजिक सरोकारों से रूबरू हुए श्रोता
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: वरिष्ठ कवि एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के निवर्तमान आचार्य एवं अध्यक्ष प्रो. दिनेश कुशवाह की कविताओं ने रविवार को छपरा के साहित्यिक आयोजन में श्रोताओं को प्रेम, पीड़ा, सामाजिक विषमता और हाशिये के मनुष्य के सवालों से रूबरू कराया। रामजयपाल कॉलेज स्थित लक्ष्मीनारायण यादव अध्ययन केंद्र में आयोजित ‘सम्मान समारोह सह काव्य पाठ’ में उनके प्रभावशाली काव्य-पाठ ने पूरे माहौल को संवेदनशील और विचारोत्तेजक बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. दिनेश कुशवाह ने अपनी चर्चित कविताओं ‘इसी काया में मोक्ष’, ‘डा. विश्वनाथ त्रिपाठी का खाना’, ‘अच्छे दिनों का डर’ और ‘राजा तुम मंदिर बनवाओ’ का पाठ किया। उनकी कविताओं में सामाजिक सरोकारों के साथ मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति देखने को मिली। इतिहास और व्यवस्था के हाशिये पर चले गए श्रमिकों, वंचितों और आम लोगों की पीड़ा को उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से स्वर दिया। वहीं, प्रेम कविताओं के साथ मीना कुमारी और रेखा पर लिखी चर्चित रचनाओं के जरिए उन्होंने मनुष्य के भीतर मनुष्य की तलाश और आत्मीय संबंधों की आकांक्षा को अभिव्यक्त किया। काव्य-पाठ के दौरान श्रोताओं ने कई बार तालियों से कवि का उत्साहवर्धन किया।
समारोह में ब्रजकिशोर मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के निवर्तमान आचार्य व अध्यक्ष तथा यूपीपीएससी के पूर्व सदस्य प्रो. पंकज कुमार को उनके दीर्घ अकादमिक योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए प्रो. पंकज कुमार ने कहा कि किसी शिक्षक के लिए सबसे बड़ा सम्मान यही है कि उसके विद्यार्थी और समाज उसकी बौद्धिक यात्रा को याद रखें। उन्होंने युवाओं से पुस्तकों से जुड़ने और तर्कशील सोच विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के सूत्रधार एवं आयोजक विधान पार्षद प्रो. वीरेन्द्र नारायण यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य समाज में ज्ञान, संवाद और संवेदना को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। प्रो. लाल बाबू यादव ने साहित्य को मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाला सशक्त माध्यम बताया। समन्वयक प्रो. सिद्धार्थ शंकर ने प्रो. दिनेश कुशवाह का, जबकि डॉ. एलबी यादव ने प्रो. पंकज कुमार का परिचय प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर डॉ. अमित रंजन के काव्य-संग्रह ‘मौसिकी’ का लोकार्पण भी किया गया। डॉ. अमित रंजन ने अपने काव्य-संग्रह से एक कविता का पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. उषा कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि संचालन नदीम अहमद ने किया। समारोह में पूर्व विधायक डॉ. सीएन गुप्ता, प्रो. अशोक कुमार सिन्हा सहित साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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