'दीदी की रसोई' पर ताला: पुलिस महकमे में बंद हुई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना, जीविका ने गिनाईं कई बड़ी वजहें
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी 'दीदी की रसोई' योजना को बड़ा झटका लगा है। बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जीविका) ने पुलिस महकमे में संचालित सभी 'दीदी की रसोई' इकाइयों को बंद करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जीविका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिमांशु शर्मा ने 28 जुलाई 2026 को गृह विभाग को आधिकारिक पत्र भेजकर सेवाएं समाप्त करने की सूचना दी है।
पत्र के अनुसार, अन्नपूर्णा जीविका फूड प्रोडक्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से पुलिस मुख्यालय, पुलिस लाइन, प्रशिक्षण अकादमियों और अन्य पुलिस केंद्रों में 'दीदी की रसोई' संचालित की जा रही थी। इस योजना का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को उचित मूल्य पर घर जैसा भोजन उपलब्ध कराना तथा जीविका दीदियों को स्थायी आजीविका प्रदान करना था। लेकिन अब विभिन्न व्यावहारिक और वित्तीय समस्याओं के कारण इसे जारी रखना संभव नहीं बताया गया है।
जीविका ने बताए बंद करने के प्रमुख कारण
अधिकांश रसोई इकाइयां लगातार घाटे में चल रही थीं।
पुलिस केंद्रों में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का अभाव था।
विभाग की ओर से बकाया राशि का समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा था।
कई स्थानों पर नियमित कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) उपलब्ध नहीं कराया गया।
जीविका ने गृह विभाग से अनुरोध किया है कि लंबित बकाया राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए, ताकि अनुबंध की शर्तों के अनुसार इकाइयों को बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
महिला रोजगार और पुलिस व्यवस्था पर असर
'दीदी की रसोई' योजना बंद होने से एक ओर जहां बड़ी संख्या में जीविका दीदियों की आय और रोजगार प्रभावित होगा, वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मियों को मिलने वाली सस्ती और घर जैसी भोजन व्यवस्था भी समाप्त हो जाएगी। यह योजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती रही है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
योजना बंद होने के बाद अब प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय समन्वय की कमी पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर भुगतान और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाते, तो इस योजना को बचाया जा सकता था।
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