शहरी क्षेत्रों में 598 स्वास्थ्य केंद्रों को मंजूरी, सिर्फ 2 रुपये में मिलेगा इलाज; 31 अगस्त तक संचालन का निर्देश
पटना (बिहार) | 11 अगस्त 2026
बिहार के शहरी क्षेत्रों, खासकर स्लम और कमजोर वर्ग की आबादी को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य के 598 स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन को भारत सरकार से मंजूरी मिल गई है। इनमें 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) और 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (UHWС) शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को आगामी 31 अगस्त 2026 तक इन केंद्रों का संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सिर्फ 2 रुपये में कटेगा पर्चा, इलाज और दवाएं मुफ्त
नए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। ओपीडी में चिकित्सकीय परामर्श के लिए मरीज को केवल 2 रुपये का पर्चा कटवाना होगा। यह राशि जन आरोग्य समिति के बैंक खाते में जमा होगी और केंद्र के विकास एवं संचालन में उपयोग की जाएगी। मरीजों की सुविधा को देखते हुए यूपीएचसी सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक, जबकि यूएचडब्ल्यूसी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित किए जाएंगे।
12 प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी उपलब्ध
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, स्वास्थ्य परामर्श, संचारी एवं गैर-संचारी रोगों की जांच और मुफ्त दवा वितरण समेत करीब 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्लम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष दूरस्थ स्वास्थ्य शिविर और आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित करने का भी प्रावधान किया गया है।
पटना में 11 जन सेवा केंद्र बनेंगे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
राजधानी पटना में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने के लिए पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल के तहत संचालित 11 जन सेवा केंद्रों को भी शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन केंद्रों के संचालन को भी केंद्र सरकार से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में भी स्वास्थ्य केंद्र
युवाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शहरी निकाय क्षेत्रों में स्थित 19 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों और 14 राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में भी शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित किए जाएंगे। इन केंद्रों को भी केंद्र सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इससे बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को अपने संस्थान के आसपास प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
सरकारी भवन नहीं तो किराये के मकान में शुरू होगा केंद्र
स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना मुख्य रूप से शहरी स्लम आबादी के आसपास की जाएगी। इसके लिए सरकारी भवनों को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि सरकारी भवन उपलब्ध नहीं है तो निर्धारित मानकों के अनुरूप निजी भवन किराये पर लेकर केंद्र शुरू किए जा सकेंगे। भवन ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए और उसमें 4-5 कमरे तथा महिला एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था आवश्यक होगी। यूपीएचसी के लिए अधिकतम 25 हजार रुपये प्रतिमाह और यूएचडब्ल्यूसी के लिए अधिकतम 10 हजार रुपये प्रतिमाह किराये का प्रावधान किया गया है।
'शहरी आशा' और महिला आरोग्य समिति निभाएगी अहम भूमिका
शहरी समुदाय तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने के लिए 'शहरी आशा' का चयन किया जाएगा। इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के लिए महिला आरोग्य समिति का गठन किया जाएगा। स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति होने तक विभागीय निर्देश के अनुसार रोस्टर के आधार पर एक एमबीबीएस चिकित्सक तथा आवश्यकता के अनुसार एएनएम या स्टाफ नर्स की प्रतिनियुक्ति संबंधित सिविल सर्जन द्वारा की जाएगी। सरकार की इस पहल से शहरी गरीब और स्लम आबादी को अपने आसपास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।
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