104 वर्ष की आयु में पंडित रामसागर पाण्डेय का निधन, शिक्षा व सामाजिक जगत में शोक की लहर
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: जिले के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं भारतेश्वरी मारवाड़ी संस्कृत महाविद्यालय, छपरा के प्रधानाचार्य डॉ. गजानन पाण्डेय के पिता पंडित रामसागर पाण्डेय का 104 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने सोमवार को सीवान के निराला नगर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही शिक्षा, सामाजिक एवं धार्मिक जगत से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार दरौली घाट पर किया गया, जहां परिजनों, शुभचिंतकों और समाज के लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
पंडित रामसागर पाण्डेय लंबे समय से अनुशासित, धार्मिक एवं सादगीपूर्ण जीवन के लिए जाने जाते थे। उम्र के 104वें पड़ाव तक भी उन्होंने अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित बनाए रखा। प्रतिदिन नियमित व्यायाम, पूजा- पाठ और डायरी लेखन उनकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उनका मानना था कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए अनुशासन सबसे जरूरी है। यही कारण था कि बढ़ती उम्र के बावजूद वे अपनी दिनचर्या के प्रति पूरी तरह सजग रहते थे। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। परिजनों ने बताया कि पंडित रामसागर पाण्डेय के दोनों पुत्र और परिवार के सभी सदस्य उनकी सेवा में सदैव तत्पर रहे। परिवार के लोगों ने उनकी सेवा को अपना सौभाग्य माना। वह परिवार के सभी सदस्यों से बेहद स्नेह और अपने अनुभवों एवं विचारों से आने वाली पीढ़ी का मार्गदर्शन करते थे।
उनका जीवन सादगी, अनुशासन, धार्मिक आस्था और पारिवारिक संस्कारों का उदाहरण रहा है। 104 वर्ष की आयु में उनके निधन को परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके निधन पर शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, शुभचिंतकों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया। लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों को इस दुख की घड़ी में धैर्य प्रदान करने की कामना की है।

