ताजपुर में परित्यक्त पुल के बगल का पुराना लोहा वाला पुल भी जर्जर, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
जर्जर पुल पर बढ़ता आवागमन, प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी-सिसवन मुख्य मार्ग पर ताजपुर स्थित दहा नदी के पुल को लेकर लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। बिहार पुल निगम द्वारा निर्मित पुल की स्थिति दयनीय और खतरनाक होने के बाद सारण जिला प्रशासन ने उसे परित्यक्त घोषित कर कुछ माह पूर्व बैरिकेडिंग करा दी। हालांकि, आवागमन के लिए अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
परित्यक्त पुल से आवागमन बंद होने के बाद टोटो संचालक यात्रियों को बगल में स्थित पुराने पुल से ले जाने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पुराना पुल भी जर्जर अवस्था में है और अधिक भार सहने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में इस पुल से लगातार आवागमन करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।
वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से बढ़ी परेशानी
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि परित्यक्त पुल के कारण लोगों को मजबूरी में पुराने पुल का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है। खासकर टोटो और अन्य वाहनों के आवागमन से पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
चेफुल पंचायत के पैक्स अध्यक्ष संत सिंह ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले दिनों में बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
पुल के पुनर्निर्माण की मांग
मांझी के पूर्व उप प्रमुख राम कृष्ण सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से ताजपुर स्थित परित्यक्त पुल के पुनर्निर्माण की दिशा में अविलंब पहल करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पुल के निर्माण से क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि पुराने पुल की स्थिति का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए।

