सावन का सुहाना मनभावन मौसम मन में कुछ कसक जगाता है। उस कसक की भावना को शब्दों में पिरोया है, कवियित्री किरण बरेली ने।।
/// जगत दर्शन न्यूज
प्रिय, बारिश की बूंदों का मनुहार है!
इस बारिश के मौसम में
कुछ हसीन सपने बोए
पल/पल कर रहे हैं मनुहार
सावन कुछ दिन और ठहर जाए ।।
चंचल बूंदों की भीगी/भीगी मुस्कान
पिया मिलन की आस जगाए
बरसता मौसम नहीं भिगोया तन-मन
बिन तेरे मुझे सावन भी न भाए।
किरण।।

