किलकारी में सावन उत्सव की धूम, बच्चों ने लोक संस्कृति और प्रकृति प्रेम का दिया संदेश
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सारण जिला मुख्यालय स्थित बिहार बाल भवन किलकारी, छपरा में सावन उत्सव का आयोजन हर्षोल्लास और उत्सवी माहौल में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को भारतीय लोक संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति से जोड़ने के साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना था। सावन की थीम पर कार्यक्रम स्थल को हरियाली, पारंपरिक झूलों और फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था।
लोक संस्कृति और प्रकृति का दिखा संगम
सावन की हरियाली, पारंपरिक संगीत और लोक नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। किलकारी के बच्चों ने नृत्य, संगीत और कविता के माध्यम से सावन की सुंदरता और प्रकृति के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी रही। झांकी और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों और अतिथियों का मन मोह लिया।
प्रतियोगिताओं में बच्चों ने दिखाया हुनर
उत्सव के दौरान बच्चों के लिए विभिन्न रचनात्मक एवं मनोरंजक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। सावन राजा और सावन रानी प्रतियोगिता में बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में अपनी प्रतिभा दिखाई। वहीं पारंपरिक हरे परिधान की प्रतियोगिता में बच्चों ने सावन और भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
बच्चियों के लिए आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता में बाल कलाकारों ने हाथों पर आकर्षक पारंपरिक डिजाइन बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
अभिभावकों ने भी लिया उत्सव का आनंद
सावन उत्सव में बच्चों के साथ उनके अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। अभिभावकों के लिए आयोजित म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता में माता-पिता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बच्चों के साथ उत्सव का आनंद साझा किया।
पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया गया। बताया गया कि सावन केवल उत्सव और हरियाली का महीना नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेने का भी अवसर है।
बच्चों और उपस्थित लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा आसपास के पर्यावरण को हरा-भरा और सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया गया।
किलकारी द्वारा आयोजित इस सावन उत्सव ने लोक संस्कृति, कला, रचनात्मकता और प्रकृति प्रेम को एक साथ जोड़ते हुए बच्चों और अभिभावकों को उत्साह से भर दिया। कार्यक्रम ने बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ भारतीय परंपराओं और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने का अवसर भी प्रदान किया।

