विश्व आईवीएफ दिवस: निःसंतान दंपतियों के लिए उम्मीद की नई किरण, जागरूकता बढ़ाना मुख्य उद्देश्य
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: प्रत्येक वर्ष 25 जुलाई को विश्व आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य आईवीएफ तकनीक के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना, बांझपन से जुड़े सामाजिक मिथकों और भ्रांतियों को दूर करना तथा निःसंतान दंपतियों को आधुनिक चिकित्सा के माध्यम से माता-पिता बनने की नई उम्मीद देना है। इसी दिन वर्ष 1978 में दुनिया की पहली आईवीएफ शिशु लुईस ब्राउन का जन्म हुआ था। उनके जन्म के साथ ही प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई और आईवीएफ तकनीक ने संतान प्राप्ति की उम्मीद रखने वाले लाखों दंपतियों के लिए एक नई राह खोली।
आईवीएफ लाखों परिवारों के विश्वास और उम्मीद का प्रतीक: डॉ. कुमार रवि रंजन
प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. कुमार रवि रंजन ने बताया कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, अनियमित खान-पान, प्रदूषण, बढ़ती उम्र में विवाह, हार्मोनल असंतुलन तथा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण पुरुषों और महिलाओं में बांझपन की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में आईवीएफ जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीक कई परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आईवीएफ केवल एक चिकित्सा तकनीक नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के विश्वास, उम्मीद और खुशियों का प्रतीक है, जो संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जागरूकता, समय पर जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह से कई दंपतियों को उचित उपचार का रास्ता मिल सकता है।
बांझपन कोई अभिशाप नहीं, चिकित्सकीय स्थिति है: डॉ. रुपाली रस्तोगी
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. रुपाली रस्तोगी ने कहा कि समाज में आज भी बांझपन को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और सामाजिक दबाव मौजूद हैं। अक्सर संतान न होने की स्थिति के लिए केवल महिलाओं को जिम्मेदार माना जाता है, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से प्रजनन संबंधी समस्या पुरुष या महिला, दोनों में से किसी में भी हो सकती है। इसलिए समय पर जांच, उचित चिकित्सकीय परामर्श और सही उपचार बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बांझपन कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसके लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। विश्व आईवीएफ दिवस का उद्देश्य दंपतियों को सामाजिक संकोच और मानसिक तनाव से बाहर निकलकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने तथा आवश्यकता होने पर समय पर उपचार शुरू करने के लिए प्रेरित करना भी है।
विश्व आईवीएफ दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों का संदेश है कि प्रजनन संबंधी समस्याओं को लेकर दंपतियों को बिना झिझक चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से कई मामलों में समस्या का समाधान संभव है। साथ ही परिवार और समाज को भी ऐसे दंपतियों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए, ताकि वे सामाजिक दबाव से मुक्त होकर उचित चिकित्सा और मानसिक सहयोग प्राप्त कर सकें।
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