मुंशी प्रेमचंद के विचार आज भी समाज के लिए प्रासंगिक : प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर रामजयपाल महाविद्यालय, छपरा परिसर स्थित लक्ष्मी नारायण यादव अध्ययन केन्द्र में इप्टा, छपरा के तत्वावधान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बिहार विधान परिषद सदस्य एवं हिंदी साहित्य के प्रख्यात विद्वान प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि जब तक समाज में शोषण, दमन, अत्याचार, विषमता और सांप्रदायिकता जैसी बुराइयाँ मौजूद रहेंगी, तब तक मुंशी प्रेमचंद के विचार और उनका साहित्य सदैव प्रासंगिक बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी अमर रचनाओं 'सोज-ए-वतन', 'पंच परमेश्वर', 'मृतक भोज', 'नमक का दारोगा', 'कफ़न', 'ठाकुर का कुआँ', 'गोदान' और 'गबन' के माध्यम से भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को वैचारिक शक्ति प्रदान की तथा समाज में समानता, न्याय और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।
इस अवसर पर अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजीव कुमार ने प्रेमचंद के आदर्शों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं डॉ. दिनेश पाल ने 'मृतक भोज', अरविंद यादव ने 'कफ़न' तथा सुरेंद्र सिंह ने 'नमक का दारोगा' के माध्यम से प्रेमचंद के साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
सारण जिला जदयू के अध्यक्ष बैजनाथ सिंह विकल ने प्रेमचंद को आधुनिक भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर बताते हुए उन्हें 'कलम का जादूगर' कहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) लालबाबू यादव ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि मुंशी प्रेमचंद समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की पीड़ा को साहित्य के केंद्र में लाने वाले लेखक थे। उनके साहित्य में सामाजिक न्याय, संवेदना और मानवीय मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
संगोष्ठी में डॉ. श्याम शरण, डॉ. पृथ्वीराज सिंह, डॉ. अमित रंजन, विद्यासागर विद्यार्थी, इप्टा के अध्यक्ष सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, युवा सामाजिक कार्यकर्ता प्रिंस राज, डॉ. अनिल कुमार, सुमन जी, ओमप्रकाश शर्मा तथा इप्टा के सचिव शैलेन्द्र शाही सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
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