पत्रकारों के सम्मान पर सवाल: बेतिया से पटना तक बढ़ा विरोध, चंपारण से ‘पत्रकार सत्याग्रह-2’ की चेतावनी
बेतिया (बिहार): बिहार विधानसभा में दो पत्रकारों के प्रवेश पास रद्द किए जाने के विरोध में पत्रकारों द्वारा किए गए कार्य बहिष्कार और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। पत्रकारों ने विधानसभा परिसर में अपने कैमरे और माइक जमीन पर रखकर विरोध दर्ज कराया और दोनों पत्रकारों के प्रवेश पास बहाल होने तक विधानसभा की कार्यवाही की कवरेज, नेताओं की बाइट तथा अन्य समाचार कवरेज के सामूहिक बहिष्कार का ऐलान किया है।
इस मामले को लेकर अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति, पश्चिम चंपारण शाखा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए घटना की निंदा की है। समिति ने पत्रकारों के कार्य बहिष्कार को जायज ठहराते हुए कहा कि पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव, दुर्व्यवहार या अधिकारों का हनन लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर चिंता का विषय है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बेतिया से लेकर पटना तक पत्रकारों के साथ कथित प्रताड़ना और ग्रामीण पत्रकारों के साथ भेदभावपूर्ण रवैये की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, जिन पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
समिति ने पत्रकार पेंशन योजना की कठोर शर्तों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसके कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण और छोटे स्तर पर कार्य करने वाले पत्रकार योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं। समिति का कहना है कि पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजनाओं में व्यावहारिक सुधार किया जाना चाहिए, ताकि लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे योग्य पत्रकारों को उनका अधिकार मिल सके।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने बिहार के मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और पत्रकारों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। समिति ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं और उनके कार्य में अनावश्यक बाधा उत्पन्न करना लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उचित नहीं है।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि पत्रकारों की समस्याओं और अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश संगठन के साथ विचार-विमर्श के बाद चंपारण की धरती से ‘पत्रकार सत्याग्रह आंदोलन-2’ शुरू किया जाएगा। समिति के अनुसार पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर अभियान की शुरुआत गुजरात से हो चुकी है और इसके अगले चरण में बिहार में भी आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी की जाएगी। समिति ने पत्रकारों से एकजुट होकर अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने का आह्वान किया है।
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