ना भाजपा, ना कांग्रेस, लोकतंत्र की पुजारिन हूं
✍️संध्या वर्मा
ना भाजपा की बात करती हूं, ना कांग्रेस की बात करती हूं,
लोकतंत्र की पुजारिन हूं, अपने देश की बात करती हूं।
जाति- धर्म के झगड़ों से मिलता नहीं कोई निष्कर्ष,
मैं तो प्रेम, सद्भाव और सुंदर परिवेश की बात करती हूँ।
सत्ता चाहे पक्ष में हो या फिर हो प्रतिपक्ष में,
जनता तक पहुँचे जो ऐसा सच्चा संदेश की बात करती हूँ।
भूखे पेट और सूखे खेतों की पीड़ा देखकर,
रोटी, शिक्षा, रोज़ी वाले हर विशेष की बात करती हूँ।
सीमा पर जो डटे हुए हैं, उनके त्याग के सामने,
मैं उनके साहस, शौर्य और दृढ़ आवेश की बात करती हूँ।
नफ़रत के बाज़ारों में जो बिकता नहीं किसी दाम,
मैं मन से मिटते हुए हर द्वेष की बात करती हूँ।
'संध्या' मेरी कलम नहीं किसी दल की प्रवक्ता है,
मैं लोकतंत्र के पावन उपदेश की बात करती हूँ।

