मुहर्रम का चांद दिखते ही ताजिया निर्माण शुरू, हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना मांझी क्षेत्र
सारण (बिहार) संवाददाता बिट्टू यादव: मुहर्रम का चांद नजर आते ही मांझी प्रखंड क्षेत्र में ताजिया निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। जई छपरा गांव समेत प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में लोग पूरे उत्साह के साथ ताजिया बनाने में जुट गए हैं। खास बात यह है कि यहां मुहर्रम केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बनकर उभरता है।
मांझी प्रखंड के जई छपरा, मटियार, ईमादपुर, अल्लीपुर ताजपुर सहित कई गांवों में बांस, लकड़ी, थर्मोकोल, रंग-बिरंगे कागज और अन्य सजावटी सामग्रियों से आकर्षक एवं भव्य ताजिया तैयार किए जा रहे हैं। ताजिया निर्माण में मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ हिंदू समुदाय के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। कोई सजावट में सहयोग कर रहा है तो कोई सामग्री जुटाने और कारीगरों की मदद में लगा है।
दिन-रात चल रहे इस कार्य में दोनों समुदायों के बच्चे, युवा और बुजुर्ग एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुहर्रम के अवसर पर दिखाई देने वाला यह भाईचारा वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जो क्षेत्र की पहचान बन चुका है।
जई छपरा गांव के समाजसेवी एम.डी. मुश्ताक ने बताया कि चांद दिखाई देते ही ताजिया निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम भाइयों का सहयोग इस आयोजन को और भी खास बना रहा है। ताजिया जितना सुंदर बनेगा, उतनी ही हमारी एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होगी। जुलूस के दिन पूरा क्षेत्र शांति, सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश देगा।
मुहर्रम इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत की याद में मनाया जाता है और मांझी क्षेत्र में यह पर्व सदियों से आपसी भाईचारे और सौहार्द के वातावरण में मनाया जाता रहा है। प्रशासन भी शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर सतर्क है तथा सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि मांझी प्रखंड की यह हिंदू-मुस्लिम एकता पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत है और सामाजिक सद्भाव की एक अनूठी मिसाल प्रस्तुत करती है।

