श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की 61वीं पुण्यतिथि
त्याग, तपस्या, ममता, ज्ञान और शक्ति की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती : बीके अनामिका दीदी
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती (मम्मा) की 61वीं पुण्यतिथि बुधवार को छपरा सेवा केंद्र पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारी परिवार के भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर मातेश्वरी के आदर्शों को स्मरण किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छपरा सेवा केंद्र की प्रभारी बीके अनामिका दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती त्याग, तपस्या, ममता, ज्ञान और शक्ति की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ईश्वरीय सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने अपने जीवन की संपूर्ण कमाई को ट्रस्ट के रूप में समर्पित किया था और मातेश्वरी जगदंबा को उस ट्रस्ट का प्रमुख दायित्व सौंपा था।
बीके अनामिका दीदी ने बताया कि मम्मा निर्भय, निडर और दृढ़ संकल्प वाली महान आध्यात्मिक विभूति थीं। उन्होंने ब्रह्मा बाबा के प्रत्येक महावाक्य को अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाकर समाज के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत किया। उनका जीवन आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
इस अवसर पर बीके अरविंद भाई ने उपस्थित सभी भाई-बहनों को परमपिता परमात्मा की याद में राजयोग मेडिटेशन कराया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से भर गया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने मातेश्वरी के जीवन चरित्र, उनके आध्यात्मिक योगदान और सेवा कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि मातेश्वरी का त्यागमय और प्रेरणादायी जीवन वर्तमान पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है। सभी ने उनके बताए आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में शांति, प्रेम और सद्भाव फैलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने ब्रह्मा भोजन ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में बीके सुरेंद्र भाई, बीके गणेश भाई, बीके जितेंद्र भाई, बीके वीरेंद्र भाई, बीके देवानंद भाई, बीके प्रियांशु बहन, बीके प्रीति, बीके खुशबू बहन सहित अन्य भाई-बहनों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

