डेटा की सटीकता से सशक्त होगा 'चाइल्ड हेल्थ', स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल
बच्चों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए डेटा वैलिडेशन अभियान शुरू, यूनिसेफ का भी सहयोग
पटना (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार सरकार ने राज्य में शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य स्वास्थ्य समिति के शिशु स्वास्थ्य कोषांग द्वारा चाइल्ड हेल्थ से संबंधित आंकड़ों के व्यापक सत्यापन (डेटा वैलिडेशन) की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य एवं पोषण योजनाओं के क्रियान्वयन को मजबूत बनाते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, विश्वसनीय और सटीक आंकड़े ही किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम की सफलता की आधारशिला होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न संकेतकों की गहन समीक्षा और सत्यापन किया जा रहा है, ताकि भविष्य की योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार की जा सकें।
चाइल्ड हेल्थ के सभी प्रमुख संकेतकों पर फोकस
इस अभियान के तहत डायरिया नियंत्रण, ओआरएस एवं जिंक की उपलब्धता, नवजात शिशुओं के जन्म के बाद गृह भ्रमण, स्तनपान को बढ़ावा देने तथा बाल स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग का मानना है कि सटीक डेटा के आधार पर ही जरूरतमंद बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
पोषण और नवजात देखभाल की होगी बेहतर निगरानी
गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए संचालित पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में दाखिले, उपचार और फॉलो-अप की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। साथ ही नवजात शिशुओं के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे बच्चों की देखभाल से संबंधित योजनाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ सके।
विशेषज्ञों ने बताया सराहनीय कदम
आईजीआईएमएस के प्रोफेसर एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रिजवान अहमर ने कहा कि बाल स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों की सफलता विश्वसनीय आंकड़ों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की यह पहल समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ राज्य के मानव विकास सूचकांक को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सभी जिलों को दिए गए आवश्यक निर्देश
राज्य स्वास्थ्य समिति के मार्गदर्शन में सभी जिलों के सिविल सर्जनों तथा प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालयों के अधीक्षकों को इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का लक्ष्य चाइल्ड हेल्थ से जुड़े आंकड़ों को पूरी तरह प्रमाणित एवं व्यवस्थित बनाना है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस पहल से न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी और मजबूत होगी। इस महत्वपूर्ण अभियान के तकनीकी संचालन एवं मॉनिटरिंग में यूनिसेफ का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।

