नहर में पानी नहीं मिलने से बढ़ी किसानों की चिंता, धान का बिचड़ा सूखने की कगार पर
सिवान (बिहार) संवाददाता बिट्टू यादव: दरौंदा प्रखंड क्षेत्र में नहरों में पानी नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। मिल्की, हड़सर, हाथोपुर, कोड़ारी कलां होते हुए कमसड़ा तक जाने वाली मुख्य नहर सूखी पड़ी है, जिससे इलाके के सैकड़ों किसानों के सामने सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। समय पर पानी नहीं मिलने के कारण धान का बिचड़ा सूखने की आशंका गहराने लगी है।
किसानों ने बताया कि धान का बिचड़ा तैयार करने के लिए इस समय पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन नहर में पानी नहीं रहने से वे निजी साधनों पर निर्भर हो गए हैं। कई किसान डीजल पंप और बोरिंग के सहारे खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ रही है।
हड़सर और कोलुआ गांव के किसानों का कहना है कि नहर क्षेत्र की सिंचाई की मुख्य जीवनरेखा मानी जाती है। नहर सूखी रहने के कारण धान की बिचड़ा फसलें प्रभावित हो रही हैं और यदि जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो रोपाई का कार्य भी प्रभावित हो सकता है। किसानों को डर है कि उनकी मेहनत और निवेश दोनों बर्बाद हो जाएंगे।
किसान पवन कुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने साहूकारों और बैंकों से कर्ज लेकर महंगे बीज और खाद खरीदे हैं। अब पानी के अभाव में फसल खराब होने की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि “नहर सूखी होने के कारण फसल को बचाना मुश्किल हो गया है। अगर जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।”
किसानों ने आरोप लगाया कि कई बार सिंचाई विभाग एवं संबंधित अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द नहर में पानी छोड़ने की मांग की है, ताकि धान की खेती को बचाया जा सके।
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