‘अक्षरा’ साहित्य महोत्सव में गूंजे नारी विमर्श के स्वर, महिला लेखन की भूमिका पर हुआ मंथन
भुवनेश्वर (उड़ीसा): तोषाली लिटरेचर सोसाइटी द्वारा आयोजित ‘अक्षरा’ साहित्य महोत्सव में भारतीय साहित्येतिहास में महिलाओं की भूमिका, उनके लेखन और सामाजिक योगदान पर व्यापक विमर्श किया गया। साहित्य में महिला स्वरों की पुनर्प्रतिष्ठा को केंद्र में रखकर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, विद्वान और सांस्कृतिक चिंतक शामिल हुए।
कार्यक्रम का संयोजन पूर्व आईएएस अधिकारी प्रदीप बिस्वाल और साहित्यकार परेश पटनायक ने किया। महोत्सव का उद्घाटन पूर्व राज्य सूचना आयुक्त परमिता सत्पथी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज में नैतिक सार्वजनिक विमर्श को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
मुख्य वक्ता रानू उनियाल ने भारतीय साहित्य के इतिहास-लेखन पर विचार रखते हुए महिला लेखन के हाशियाकरण और साहित्यिक परंपरा में उसकी उपेक्षा पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिला लेखन को मुख्यधारा के विमर्श में समुचित स्थान मिलना आवश्यक है।
महोत्सव की मुख्य अतिथि हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की कुलपति एवं इग्नू में अंग्रेजी की प्रोफेसर प्रो. नंदिनी साहू ने साहित्य की समकालीन सामाजिक प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने जेंडर स्टडीज़, विमेंस स्टडीज़, क्वीयर स्टडीज़, भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन और नई शिक्षा नीति (एनईपी) के संदर्भ में साहित्यिक अध्ययन के अंतःविषयक स्वरूप को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘तोशाली एंथोलॉजी ऑफ लव पोएम्स’ पुस्तक का लोकार्पण रहा। इस संकलन का संपादन प्रदीप बिस्वाल, परेश पटनायक और नमिता रानी पांडा ने किया है। पुस्तक लोकार्पण के दौरान उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
महोत्सव में विजयलक्ष्मी रथ, सरोजिनी साहू, चिरश्री इंद्रसिंह, प्रज्ञा प्रवर्तिका दाश, जयंती रथ, चिन्मयी नंदा, अपर्णा मोहंती, स्नेहप्रभा दास, नमिता लक्ष्मी जगदेव, संघमित्रा भांजा, महुआ सेन, प्रवासिनी महाकुड़, लोपामुद्रा मिश्रा और सरिता प्रुष्टी सहित कई ओडिया लेखिकाओं ने साहित्य और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में डॉ. गौरहरि दास, प्रो. गोपा रंजन मिश्रा, भास्कर परिच्छा और दीपक सानंत्राय समेत कई प्रतिष्ठित साहित्यकार और विद्वान भी उपस्थित रहे। ‘अक्षरा’ साहित्य महोत्सव को महिला साहित्यिक योगदान और समाज में साहित्य की परिवर्तनकारी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं अकादमिक पहल माना जा रहा है।

