गंगा दशहरा: रामघाट पर उमड़ा आस्था का सैलाब
हर-हर गंगे के जयकारों से गूंजा रामघाट
सारण (बिहार) संवाददाता नितेश सिंह: गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मंगलवार को मांझी के प्रसिद्ध रामघाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचने लगे थे। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और रामघाट सहित आसपास के अन्य घाटों पर भी आस्था का जनसैलाब देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने हनुमानगढ़ी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना भी की।
गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ मां गंगा की पूजा-अर्चना की। जल अर्पित कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए तथा पुरोहितों के मार्गदर्शन में विशेष पूजन कराया गया। श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य कर जरूरतमंदों की सहायता भी की। घाटों पर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में परिवार पहुंचे। पूरे दिन भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का वातावरण बना रहा।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन एवं नगर पंचायत प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। घाटों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालु गहरे पानी में न जा सकें और पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
गंगा दशहरा के अवसर पर "हर-हर गंगे" और "जय मां गंगे" के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं की श्रद्धा और उत्साह ने रामघाट को विशाल धार्मिक मेले का स्वरूप दे दिया।
पंडित रंजन शर्मा ने बताया कि सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। पुराणों में इस दिन गंगा स्नान, जप, तप और दान के विशेष महत्व का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि गंगा दशहरा पर श्रद्धा भाव से स्नान एवं पूजन करने से व्यक्ति को दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

