इलाज में लापरवाही के आरोप पर कानपुर में बवाल, ITBP जवान की मां का हाथ काटने के मामले में अस्पतालों पर FIR के आदेश
✍️ धर्मेंद्र रस्तोगी:
कानपुर (उत्तर प्रदेश): इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी का इलाज के दौरान हाथ काटे जाने का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की पहली जांच रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद महज 36 घंटे के भीतर दूसरी जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। नई रिपोर्ट के आधार पर कानपुर के कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल के आइस बॉक्स में लेकर पिछले कई दिनों से न्याय के लिए भटक रहे थे। मामला तब और गंभीर हो गया जब आईटीबीपी के जवान अपने कमांडेंट के साथ पुलिस कार्यालय पहुंच गए और कार्रवाई की मांग करने लगे। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की दोबारा जांच कराई गई।
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट में दोनों अस्पतालों को क्लीन चिट दे दी गई थी, जिससे डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन को बचाने के आरोप लगने लगे। हालांकि दूसरी जांच में दोनों अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि कृष्णा अस्पताल में मरीज के हाथ की गंभीर स्थिति को किसी विशेषज्ञ सर्जन को नहीं दिखाया गया था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों से इनकार किया है।
मामले ने अब स्वास्थ्य विभाग, निजी अस्पतालों की कार्यशैली और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कल्याणपुर-शिवली रोड स्थित कई निजी अस्पतालों में नामचीन डॉक्टरों के नाम बोर्ड पर लिखे होने के बावजूद मौके पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है।
घटना के बाद कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर आईटीबीपी जवानों के पहुंचने और विरोध जताने की खबर ने मामले को और संवेदनशील बना दिया। पुलिस आयुक्त कार्यालय में भारी हलचल के बाद प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति शांत हुई।
यह मामला अब केवल मेडिकल लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य अधिकार, निजी अस्पतालों की जवाबदेही और सुरक्षा बलों के सम्मान से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

