बोल्डर पीचिंग से मांझी के घाट हो रहे खतरनाक, ग्रामीणों ने उठाई समतलीकरण की मांग
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: छपरा-बलिया रेलखंड पर स्थित मांझी रेलपुल को सरयू नदी के कटाव से बचाने के लिए रेल विभाग द्वारा कराए जा रहे बोल्डर पीचिंग कार्य से जहां एक ओर कटाव रुकने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। नदी किनारे उबड़-खाबड़ स्थिति बनने से कई घाटों पर स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित घाटों के समतलीकरण की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि रामघाट, बैरिया घाट, सोनासती घाट तथा बाबा मधेश्वर नाथ घाट के आसपास बोल्डर पीचिंग के कारण नदी किनारा असमतल और खतरनाक हो गया है। तेज धारा और गहरे पानी के साथ-साथ ऊपर की पथरीली सतह के कारण लोगों का नदी तक पहुंचना कठिन हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार रामघाट के समीप की स्थिति सबसे अधिक गंभीर हो गई है, जहां फिसलने और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
बताया जा रहा है कि रेल विभाग द्वारा रेलपुल से पश्चिम दिशा में लगभग 1500 मीटर लंबाई और 60 मीटर चौड़ाई में बोल्डर पीचिंग का कार्य कराया जा रहा है। निर्माण कार्य में जेसीबी, मोटरबोट, नाव और दर्जनों मजदूर लगाए गए हैं। पहले ही रामघाट से श्मशान घाट तक बोल्डर पीचिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि घाटों की बदहाल स्थिति के कारण खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को स्नान एवं धार्मिक कार्यों में काफी परेशानी हो रही है। लोगों ने प्रशासन और रेल विभाग से मांग की है कि बोल्डर पीचिंग के साथ-साथ घाटों को समतल और सुरक्षित बनाने की व्यवस्था भी की जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
हालांकि क्षेत्र के कई किसानों और जानकारों का मानना है कि इस परियोजना से सरयू नदी के कटाव पर रोक लगेगी और सैकड़ों एकड़ भूमि सुरक्षित हो जाएगी। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।

