जापान में गूंजेगी हिंदी : डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा विश्व हिंदी परिषद की जापान शाखा की अध्यक्ष मनोनीत
दो विश्व कीर्तिमान, 20 से अधिक पुस्तकें, किन्नर उत्थान से लेकर सुनामी सेवा तक – बहुआयामी साहित्यकार को मिली बड़ी जिम्मेदारी
✍️धर्मेंद्र रस्तोगी
लखनऊ/नई दिल्ली: विश्व हिंदी परिषद की जापान शाखा के अध्यक्ष पद पर टोक्यो निवासी प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा को मनोनीत किया गया है। परिषद के महासचिव डॉ. विपिन कुमार द्वारा जारी नियुक्ति पत्र में आशा व्यक्त की गई है कि उनके नेतृत्व में जापान में हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और साहित्यिक गतिविधियों को नई पहचान और मजबूती मिलेगी। इस मनोनयन के बाद साहित्यिक जगत एवं हिंदी प्रेमियों में खुशी का माहौल है।
डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा लंबे समय से विदेश में रहकर हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे जापान से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं ‘हिंदी की गूँज’ और ‘हीमावारी’ का संपादन कर रही हैं। उनकी 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें गोपू और सुनहरी मछली, मेरा भारत महान, जापान का सनातन धर्म शिंतो तथा दालान की धूप विशेष रूप से चर्चित हैं। इसके अलावा वे 38 साझा संकलनों और 15 से अधिक संपादित पुस्तकों से भी जुड़ी रही हैं। कविता, कहानी, हाइकु, नाटक, उपन्यास और संस्मरण जैसी विभिन्न साहित्यिक विधाओं में उनकी विशेष पहचान है।
हिंदी और पंजाबी भाषा की विदुषी डॉ. शर्मा सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़ी हैं। वे किन्नर समाज के उत्थान के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही हैं। जापान में भारतीय संस्कृति और भारतीय भोजन के प्रचार-प्रसार के लिए उन्हें कई जापानी दूरदर्शन चैनलों पर आमंत्रित किया जा चुका है। सुनामी पीड़ितों की सेवा के लिए जापान सरकार द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया है।
डॉ. शर्मा को विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस, बर्मिंघम स्थित भारतीय दूतावास, बैंकाक, दोहा और लंदन सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वे दो बार विश्व कीर्तिमान भी स्थापित कर चुकी हैं। रविंद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों ने उन्हें सम्मान प्रदान किया है। वर्तमान में वे एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
इस मनोनयन पर परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. डी. पी. मिश्रा, राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक डॉ. नन्दकिशोर साह सहित अनेक पत्रकारों, साहित्यकारों और समाजसेवियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। डॉ. साह ने कहा कि डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा का अनुभव, समर्पण और साहित्यिक योगदान जापान में हिंदी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विश्व हिंदी परिषद हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है और जापान शाखा का गठन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

