पुलिस कप्तान डॉ० शौर्य सुमन
बेतिया के पुलिस कप्तान डॉ. शौर्य सुमन: खाकी में संवेदनशीलता, सख्ती और सेवा का प्रेरणादायक चेहरा
थाना प्रभारी से लेकर एसपी बनने के जांबाज सफर की पूरी कहानी
///जगत दर्शन न्यूज
✍️ धर्मेंद्र रस्तोगी
बेतिया। चिकित्सकीय संवेदनशीलता और भारतीय पुलिस सेवा की दृढ़ कार्यशैली का अद्भुत संगम यदि किसी अधिकारी में देखने को मिलता है, तो वह नाम है पश्चिम चंपारण के पुलिस अधीक्षक डॉ. शौर्य सुमन। वर्ष 2017 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी डॉ. शौर्य सुमन ने अपने अब तक के प्रशासनिक जीवन में यह साबित किया है कि पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुरक्षा, न्याय और भरोसा पहुंचाने का माध्यम भी है।
मुंबई के प्रतिष्ठित जेजे मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉ. शौर्य सुमन कभी मरीजों की नब्ज टटोला करते थे, लेकिन आज वही अधिकारी अपराधियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखते हुए कानून व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं। उनका जीवन सफर संघर्ष, सेवा और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी बन चुका है।
प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली महत्वपूर्ण तैनाती रोहतास जिले के काराकाट थाना में थाना प्रभारी के रूप में हुई। महज ढाई महीने के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने बालू माफियाओं और स्थानीय अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अपनी कार्यशैली की स्पष्ट छाप छोड़ दी। एक आईपीएस अधिकारी का जमीनी स्तर पर थाना प्रभारी बनकर काम करना और सीधे जनता से संवाद स्थापित करना उनकी नेतृत्व क्षमता का मजबूत आधार साबित हुआ।
इसके बाद भारत-नेपाल सीमा से सटे मधुबनी जिले के संवेदनशील जयनगर अनुमंडल में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के रूप में उन्होंने शराब तस्करी और सीमा पार अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया। शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने तथा तस्करी नेटवर्क पर नकेल कसने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें महकमे में एक ईमानदार, कड़क और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई।
जनवरी 2022 में उन्हें पहली बार जमुई जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में स्वतंत्र जिम्मेदारी मिली। नक्सल प्रभावित जमुई में सितंबर 2024 तक उनका कार्यकाल बेहद सफल और चर्चित रहा। उन्होंने नक्सलियों और अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाने के साथ-साथ “कम्युनिटी पुलिसिंग” को नई पहचान दी। दूरदराज के गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर जब एक आईपीएस अधिकारी स्वयं लोगों की स्वास्थ्य जांच करता दिखा, तो लोगों के बीच पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान और गहरा हो गया। उनके इसी मानवीय दृष्टिकोण के कारण जमुई में नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ।
जमुई में उत्कृष्ट कार्यों के बाद बिहार सरकार ने सितंबर 2024 में उन्हें बेतिया पुलिस जिले की कमान सौंपी। बेतिया के एसपी के रूप में उन्होंने कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, पुलिसिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने तथा जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अपराधियों के प्रति उनकी सख्त कार्यशैली और आम लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया है।
पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार उन्होंने नरकटियागंज के शिकारपुर थाने को गोद लेकर वहां पुलिसिंग, जनसुनवाई और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की पहल शुरू की है। डॉ. शौर्य सुमन का पूरा सफर इस बात का प्रमाण है कि चाहे हाथ में स्टेथॉस्कोप हो या खाकी वर्दी, उनका मूल उद्देश्य समाज को भयमुक्त, सुरक्षित और बेहतर वातावरण देना ही रहा है।
आज उनके नेतृत्व में बेतिया पुलिस न केवल अपराध नियंत्रण की दिशा में बेहतर कार्य कर रही है, बल्कि जनता का भरोसा जीतते हुए एक नई कार्यसंस्कृति की मिसाल भी कायम कर रही है।

