हिंदी विश्वविद्यालय में नवाचार और प्रभावी शिक्षण की नई पहल, छात्रों को मिल रही नई पहचान
कोलकाता (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित हिंदी विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. नंदिनी साहू के नेतृत्व में शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बीते दो वर्षों में विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा मिली है, जिससे छात्रों और शोधार्थियों के बीच सकारात्मक और रचनात्मक वातावरण विकसित हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन करते हुए रोजगारोन्मुख एवं कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया है।
विश्वविद्यालय में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। परीक्षा प्रणाली में समर्थ पोर्टल जैसे डिजिटल साधनों को लागू किया गया है, जबकि स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक छात्रावास और केंद्रीय पुस्तकालय के आधुनिकीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही छात्र-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ई-लर्निंग, व्यवहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
कुलपति प्रो. नंदिनी साहू के कार्यकाल में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। हिंदी विभाग के छात्र राज जायसवाल ने IBPS PO परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि इतिहास विभाग के कुंदन वर्मा ने NET परीक्षा में सफलता पाई। अनुवाद अध्ययन विभाग के नीतिश कुमार यादव ने SSC CHT 2024 परीक्षा में ऑल इंडिया 17वीं रैंक प्राप्त कर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में स्थान बनाया। वहीं आरती कुमारी, कबिता कुमारी और पूनम कुमारी बिंद ने BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर शिक्षक पद प्राप्त किया।
विश्वविद्यालय में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप संस्कृति, शोध अनुदान और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहली बार सहकर्मी समीक्षा आधारित द्विभाषी अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘हुजिस’ का प्रकाशन प्रारंभ किया गया है। साथ ही तुलनात्मक विश्व साहित्य पर व्याख्यान श्रृंखला और अनुवाद कार्यशालाओं का आयोजन भी छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, संवाद क्षमता, नेतृत्व और समस्या समाधान कौशल का विकास करना भी है। इसी सोच के साथ हिंदी विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी नई पहचान स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

