मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना से बच्चों को मिल रही नई जिंदगी, अब तक 43 का हुआ सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट
पटना (बिहार): बिहार सरकार ने थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के इलाज और बेहतर भविष्य को लेकर बड़ी पहल की है। स्वास्थ्य मंत्री Nishant Kumar ने सोमवार को बताया कि मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना के तहत अब तक सात बैचों में कुल 43 बच्चों का सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) कराया जा चुका है। वहीं जल्द ही पांच और बच्चों का नया बैच इलाज के लिए तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित Christian Medical College Vellore भेजा जाएगा। यह योजना के अंतर्गत भेजा जाने वाला आठवां बैच होगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को संवेदनशील, सुदृढ़ और सर्वसुलभ बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar के नेतृत्व में 6 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना को मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिली थी। इसके बाद 4 अक्टूबर 2024 को 13 बच्चों का पहला बैच इलाज के लिए वेल्लोर भेजा गया था।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार थैलेसीमिया, हीमोफिलिया और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए बहुस्तरीय प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से राज्य में छह एकीकृत डे-केयर केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां मरीजों को जांच, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन चेलेटिंग दवाएं तथा एंटी हेमोफिलिक फैक्टर ट्रांसफ्यूजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 12 वर्ष से कम आयु के योग्य बच्चों के लिए संचालित इस योजना के तहत बिहार सरकार और सीएमसी वेल्लोर के बीच एमओयू किया गया है। ऐसे बच्चों, जिनका भाई या बहन एचएलए मैच करता है, उनका सीएमसी वेल्लोर में निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जाता है।
उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया पीड़ित प्रत्येक बच्चे के उपचार और बोन मैरो ट्रांसप्लांट पर राज्य सरकार करीब 15 लाख रुपये खर्च कर रही है। इसमें मरीज, डोनर और माता-पिता की हवाई यात्रा, इलाज, आवास, भोजन समेत अन्य आवश्यक खर्च शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार आने वाले समय में भी ऐसी जनकल्याणकारी योजनाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।

