गांव में रहकर रचा इतिहास: अमरनाथ सिंह ने मक्के की खेती से लिखी सफलता की नई कहानी
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी प्रखंड के गोबरही गांव निवासी 23 वर्षीय बीए पास अमरनाथ सिंह ने अपने दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत हों, तो सफलता निश्चित है। जहां एक ओर अधिकांश युवा बेहतर अवसरों की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं अमरनाथ ने गांव में रहकर ही करीब 40 बीघा भूमि पर मक्के की खेती कर एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने परंपरागत खेती की सोच को बदलते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाया और बेहतर उत्पादन हासिल किया।
अमरनाथ ने बताया कि उन्हें इस खेती की प्रेरणा उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में रहने वाले एक रिश्तेदार से मिली, जिन्होंने मक्के की अधिक उत्पादन क्षमता और लाभ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धान और गेहूं की खेती में जहां लागत लगभग समान होती है, वहीं मक्के की खेती अधिक लाभदायक साबित होती है। अपनी तीन बीघा जमीन के साथ-साथ उन्होंने 37 बीघा भूमि गांव के अन्य किसानों से लीज पर लेकर खेती की, जो उनके साहस और दूरदृष्टि को दर्शाता है।
फसल की सुरक्षा के लिए अमरनाथ ने विशेष रणनीति अपनाई। जंगली सुअर और नीलगाय जैसे जानवरों से बचाव के लिए खेत के चारों ओर बांस-बल्ली, जाली और बिजली के तार से घेराबंदी की गई, जिससे फसल सुरक्षित रही और उत्पादन में कोई बाधा नहीं आई।
अमरनाथ सिंह की यह पहल आज ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। एकमा के कृषि सलाहकार अरुण कुमार सिंह, शिक्षक बीके भारतीय समेत कई कृषि विशेषज्ञों ने उनकी इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अमरनाथ ने यह संदेश दिया कि कृषि में सफलता के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही रणनीति, तकनीकी ज्ञान और दूरदृष्टि भी उतनी ही आवश्यक है। उनका यह प्रयास दर्शाता है कि आज का युवा यदि ठान ले, तो गांव में रहकर भी अपने सपनों को साकार कर सकता है।
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