जटायु के वीर बलिदान का वर्णन सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, जानकी धाम में रामकथा का सातवां दिन
सारण (बिहार): सारण जिले के मांझी प्रखंड के जयी छपरा स्थित जानकी धाम में चल रहे श्रीराम कथा महायज्ञ के सातवें दिन कथावाचक पंडित अरविंद द्विवेदी जी महाराज ने भगवान श्रीराम और जटायु प्रसंग का मार्मिक वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि नासिक के पंचवटी में रहने वाले जटायु की मित्रता महाराज दशरथ से हुई थी और वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने उन्हें अपने पिता के समान सम्मान दिया।
कथावाचक ने विस्तार से बताया कि जब रावण माता सीता का हरण कर ले जा रहा था, तब जटायु ने वीरता का परिचय देते हुए रावण को रोकने का प्रयास किया। इस संघर्ष में रावण ने उनके पंख काट दिए, जिससे वे मरणासन्न होकर भूमि पर गिर पड़े। बाद में सीता की खोज में निकले भगवान श्रीराम को जटायु घायल अवस्था में मिले, जिन्होंने अंतिम समय में पूरी घटना की जानकारी दी। जटायु के निधन के बाद भगवान राम ने स्वयं उनका अंतिम संस्कार कर उन्हें सम्मानित किया।
कथा के दौरान पंडित द्विवेदी ने जटायु के बलिदान को अद्वितीय बताते हुए कहा कि एक गिद्ध होकर भी उन्होंने रावण जैसी शक्तिशाली सत्ता का सामना किया, जो भारत की वीरता और धर्मपरायणता का प्रतीक है। उन्होंने आगे शबरी प्रसंग का उल्लेख करते हुए भक्ति, विश्वास और सादगी के महत्व को समझाया तथा कहा कि सच्चा जीवन सत्य, मौन और विश्वास के मार्ग पर चलने में ही निहित है।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 श्री देवेंद्र दास जी महाराज एवं महंत ब्रजेश दास जी महाराज का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संत पूजन कर अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे परिसर में भक्ति एवं आस्था का माहौल बना रहा।

