तुम रशिया सी पावरफ़ुल, मैं यूक्रेन सा “मासूम” प्रिये
✍️ नीरेंन कुमार सचदेवा
तुम रशिया सी पावरफ़ुल,
मैं यूक्रेन सा “मासूम” प्रिये……..
लेकिन तुम बिन ये “मासूम”
जिए तो कैसे जिए……
मासूमियत नहीं है कोई तोहमत,
सच पूछो तो तुम हो ख़ुशक़िस्मत।
मुझ जैसे मासूम ने है किया तुम्हारा चयन,
वैसे तो देखे थे हमने हज़ारों ख़ूबसूरत चेहरे।
लेकिन तुम्हारी क़ातिलाना नज़रों ने
डाल दिए थे हमारे दिल पे पहरे।
जब हम तुम्हें “पावरफ़ुल” होने पर भी
कर रहें हैं स्वीकार,
तो फिर हमारे मासूम होने से
तुम्हें क्या है ऐतराज़?
देखते ही तुम्हें हमारे दिल में
बजने लगते हैं प्रेम प्रीत के मधुर साज़।
हम रहेंगे मासूम , तुम रहना ताकतवर,
बस अहसासे प्यार का
हम दोनो के दिलों पर होना चाहिए असर।
मासूमियत और सादगी,
ये नहीं हैं कोई गुनाह……..
मासूम लोग होते हैं बड़े दिलवाले,
उनके दिल में होती है बहुत जगह।
एक बार हमारी ज़िन्दगी में आ कर तो देखो,
तुम्हें पलकों पे बिठाएँगे,
सावन के झूले झुलाएँगे।
सावन का मौसम है, ऋतु बसन्त की है,
देर ना हो जाए ,
जल्दी से कर लो फैंसला…..तुम हाँ ही कहोगी,
ये है हमें हौंसला।
इस वक़्त सिर्फ़ मैं नहीं,
समस्त कायनात चाहती है कि
रशिया और यूक्रेन में ना हो अलगाव,
सब चाहते हैं कि इन दोनो में हो प्रेम भाव।
तो मेरी बन जाओ, तो ये धरती भी होगी खुश,
अब और ज़िद ना करो, मन जाओ , यही है मेरा सुझाव!
कवि——-नीरेंन कुमार सचदेवा
Let’s all strive for peace and love ❤️ in our Universe!
