कृषि विज्ञान केंद्र मांझी में सुअर पालन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, 53 युवक-युवतियों को मिला प्रमाण पत्र
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी, सारण में अनुसूचित जाति उप योजना के अंतर्गत “सुअर पालन” विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार 7 फरवरी 2026 को प्रशिक्षण कक्ष में किया गया। समापन अवसर पर प्रशिक्षण में शामिल सभी प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में युवक-युवतियों को सुअर पालन की वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना रहा।
समापन समारोह में कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. संजय कुमार राय ने प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुअर पालन कम लागत में अधिक आय देने वाला व्यवसाय है। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों से अपील की कि प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद वे अपने-अपने क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से सुअर पालन को अपनाएं और अन्य लोगों को भी इससे जोड़ें। वहीं आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. संजय कुमार सिंह ने वैज्ञानिक विधि से सुअर पालन अपनाने पर जोर देते हुए इसे ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम बताया।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. जितेन्द्र चंदोला ने बताया कि इस कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर और बेगूसराय कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों तथा सारण जिले के विभिन्न पशु चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा सुअर की उत्तम नस्ल, टीकाकरण, चारा प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण सहित वैज्ञानिक तरीके से पालन की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही बिहार सरकार द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।
डॉ. सुषमा टम्टा, डॉ. जीर विनायक एवं डॉ. विजय कुमार ने भी प्रशिक्षण सत्र के दौरान अपने विचार रखते हुए सुअर पालन को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम बताया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सारण जिले के मांझी, रिवीलगंज, गरखा एवं अमनौर प्रखंडों से राजबली राम, रविन्द्र राम, जयप्रकाश मांझी, रंजन कुमार राम, अनिल कुमार राम, अजीत कुमार मांझी, मिथिलेश कुमार राम, रामावती देवी, मुन्नी कुंवर सहित कुल 53 युवक एवं युवतियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के अमितेश कुमार गौरव, राकेश कुमार, उमाशंकर कुमार, अवनीश पांडेय एवं संतोष कुमार का सराहनीय सहयोग रहा। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए भविष्य में इसे आजीविका के रूप में अपनाने की इच्छा जताई।

