भारत–अमेरिका टैरिफ प्रस्ताव पर किसान संगठनों की हुंकार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट को लेकर भारतीय हलधर किसान यूनियन ने उठाए सवाल
/// जगत दर्शन न्यूज
नोएडा (उत्तर प्रदेश) | दिनांक 10 फरवरी 2026
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित टैरिफ एवं व्यापार व्यवस्था को लेकर देश के किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी क्रम में भारतीय हलधर किसान यूनियन के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय कोर कमेटी उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार गिरि ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर धीरेन्द्र सिंह सोलंकी और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर सिंह राघव के साथ सोमवार को दोपहर एक से दो बजे तक एक लंबी ऑनलाइन बैठक एवं विस्तृत वार्ता की। बैठक के बाद डॉ. गिरि ने एक सशक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार की चुप्पी पर चिंता जताई।
डॉ. शैलेश कुमार गिरि ने कहा कि भारत–अमेरिका के बीच प्रस्तावित टैरिफ और व्यापार समझौतों को लेकर देश के अन्नदाता और ग्रामीण आजीविका से जुड़े समुदायों में गहरी आशंका व्याप्त है। यदि कृषि, मत्स्य, डेयरी, पशुपालन, खाद्य-प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में असमान टैरिफ संरचना लागू की गई, तो इसका दुष्परिणाम केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि करोड़ों मछुआरों, पशुपालकों और ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
उन्होंने विशेष रूप से मछुआरा समुदाय की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्री और अंतर्देशीय दोनों तरह के मछुआरे पहले से ही लागत, बाजार अस्थिरता और आय सुरक्षा की समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में विदेशी उत्पादों को अनुचित टैरिफ लाभ देकर भारतीय उत्पादकों को असमान प्रतिस्पर्धा में झोंकना न केवल ग्रामीण भारत के हितों के खिलाफ है, बल्कि संविधान की मूल भावना के भी विपरीत है।
डॉ. गिरि ने कहा कि कृषि, मछुआरा और पशुपालन भारत की खाद्य संप्रभुता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में इनकी अनदेखी की गई, तो यह केवल आर्थिक संकट नहीं बल्कि एक गंभीर संवैधानिक संकट का रूप ले सकता है। उन्होंने सरकार की मौजूदा चुप्पी को आशंकाजनक बताते हुए कहा कि पूर्व में भी कई नीतिगत निर्णय ऐसे रहे हैं, जिनकी जानकारी पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दी गई और बाद में देश के किसानों व ग्रामीण समुदायों को उसके दुष्परिणाम झेलने पड़े।
भारतीय हलधर किसान यूनियन ने भारत सरकार से स्पष्ट, लिखित और सार्वजनिक उत्तर की मांग करते हुए कहा कि प्रस्तावित भारत–अमेरिका टैरिफ व्यवस्था में संविधान के अनुच्छेद 38, 39(b), 39(c), 43, 47 और 48 का विधिवत परीक्षण होना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि कृषि और मत्स्य जैसे राज्य सूची के विषय होने के बावजूद क्या सभी राज्यों और तटीय राज्यों से औपचारिक परामर्श लिया गया है या नहीं।
यूनियन ने यह भी सवाल उठाया कि इस टैरिफ व्यवस्था का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), मछली न्यूनतम मूल्य, दुग्ध एवं पशुधन मूल्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या इसका कोई प्रभाव अध्ययन कराया गया है। यदि अध्ययन हुआ है, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। इसके अलावा आरटीआई के तहत भारत और अमेरिका के बीच कृषि, मत्स्य और डेयरी से संबंधित बैठकों की तिथियां, एजेंडा, कार्यवृत्त और ड्राफ्ट प्रस्ताव सार्वजनिक करने की मांग भी की गई।
डॉ. शैलेश कुमार गिरि ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में यह प्रमाणित होता है कि भारत–अमेरिका टैरिफ व्यवस्था से किसान, मछुआरा या पशुपालक समुदाय प्रभावित हुआ, तो देश भर के किसान और किसान संगठन एक बड़े, ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक और संवैधानिक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि भारत के अन्नदाता और ग्रामीण भारत की रक्षा के लिए होगा।
भारतीय हलधर किसान यूनियन ने मांग की कि सभी प्रस्तावित टैरिफ समझौतों को सार्वजनिक किया जाए, संसद में इस पर विस्तृत बहस कराई जाए और किसान, मछुआरा व पशुपालक संगठनों से औपचारिक विमर्श के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए, ताकि MSP, मत्स्य मूल्य संरक्षण और ग्रामीण बाजारों से कोई समझौता न हो।
