छपरा विधि मंडल के बढ़े नामांकन शुल्क पर रोक, बिहार राज्य विधिक परिषद ने लिया बड़ा फैसला
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: छपरा विधि मंडल के वर्ष 2026–2028 चुनाव के लिए कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा नामांकन शुल्क में की गई पांच गुना वृद्धि को बिहार राज्य विधिक परिषद ने रद्द कर दिया है। परिषद के इस निर्णय से अधिवक्ताओं के बीच राहत की भावना देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार छपरा विधि मंडल की कार्यकारिणी द्वारा अध्यक्ष और महामंत्री पद के लिए नामांकन शुल्क 10 हजार रुपये निर्धारित किया गया था, जबकि अन्य पदों के लिए भी शुल्क में भारी बढ़ोतरी की गई थी। इस फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन बिहार राज्य विधिक परिषद को भेजकर हस्तक्षेप की मांग की थी। आवेदन की सुनवाई के बाद परिषद के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने एडवोकेट मॉडल रूल के प्रावधानों के अनुरूप संशोधित आदेश जारी किया।
नए आदेश के तहत अध्यक्ष, महामंत्री एवं उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन शुल्क एक हजार रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव एवं सहायक सचिव पद के लिए पूर्व में निर्धारित पांच हजार रुपये शुल्क को घटाकर पांच सौ रुपये कर दिया गया है। कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए 2500 रुपये की जगह अब मात्र 250 रुपये शुल्क लिया जाएगा।
विधिक परिषद, पटना से आदेश प्राप्त होते ही छपरा विधि मंडल के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कल्याण किशोर ने पूर्व में बढ़ाए गए शुल्क को निरस्त करते हुए संशोधित दरें लागू कर दी हैं। इसी के साथ मतदाता सूची में नाम जोड़ने की अंतिम तिथि भी निर्धारित थी और नामांकन पत्रों की बिक्री प्रारंभ कर दी गई है।
बिहार राज्य विधिक परिषद के हस्तक्षेप के बाद छपरा विधि मंडल के अधिवक्ताओं ने परिषद के अध्यक्ष एवं सदस्यों के प्रति आभार प्रकट किया है और इसे पारदर्शिता एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

