बच्चों के जरिए घर-घर पहुंचेगा दवा सेवन का संदेश, स्कूलों में लगेगी फाइलेरिया की पाठशाला
• सर्वजन दवा सेवन अभियान में शिक्षा विभाग की भूमिका अहम
• प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण
• स्मार्ट क्लास में बच्चों को दिखायी जायेगी फाइलेरिया से जागरूकता संबंधित वीडियो
• आगामी 10 फरवरी से चलेगा सर्वजन दवा सेवन अभियान
सिवान (बिहार): जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने इस बार स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को सबसे मजबूत कड़ी बनाने का फैसला किया है। आगामी 10 फरवरी 2026 से 27 फरवरी 2026 तक चलने वाले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग की सक्रिय भागीदारी तय की गई है। इसके तहत स्कूलों में फाइलेरिया की पाठशाला, निबंध प्रतियोगिता, स्मार्ट क्लास के माध्यम से जागरूकता वीडियो और प्रभात फेरियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि बच्चों के जरिए संदेश घर-घर तक पहुंचे। इस अभियान की तैयारियों को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में जिले के 8 प्रखंडों के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) एवं प्रत्येक प्रखंड से चयनित दो-दो शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में फाइलेरिया रोग, इसके प्रभाव, बचाव के उपाय और एमडीए अभियान में विद्यालयों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान डीपीओ एमडीएम जय कुमार, एमडीएम डीपीएम विपुल कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ ओपी लाल, जिला वेक्टर रोग सलाहकार नीरज सिंह, पिरामल के डीएल राजेश तिवारी समेत अन्य मौजूद थे।
8 प्रखंडों में चलेगा एमडीए अभियान
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओ.पी. लाल ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे में जहां माइक्रो फाइलेरिया की दर 1 प्रतिशत या उससे अधिक पाई गई है, उन प्रखंडों में एमडीए अभियान चलाया जाएगा। इनमें गुठनी, नवतन, जीरादेई, हुसैनगंज, हसनपुरा, रघुनाथपुर, लकड़ी नवीगंज और गोरेयाकोठी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों और शिक्षकों की भागीदारी इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दे सकती है।
क्या है फाइलेरिया और क्यों जरूरी है दवा सेवन:
जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार नीरज कुमार सिंह ने बताया कि लिम्फैटिक फाइलेरियासिस एक मच्छर जनित परजीवी रोग है, जो लंबे समय तक शरीर में रहकर हाथ-पैर और जननांगों में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करता है। यह बीमारी विशेष रूप से गरीब और वंचित समुदायों को प्रभावित करती है, जिससे दिव्यांगता, आजीविका का नुकसान और सामाजिक बहिष्कार जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। भारत सरकार के राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 10 फरवरी 2026 से राज्यव्यापी एमडीए अभियान प्रस्तावित है, जिसका उद्देश्य बिहार को फाइलेरिया मुक्त बनाना है।
स्कूलों की भूमिका होगी निर्णायक
• प्रखंड स्तर पर गुरु गोष्ठी एवं शिक्षक बैठकों में BEO द्वारा फाइलेरिया और एमडीए पर जागरूकता
• स्कूलों में फाइलेरिया कक्षा का आयोजन
• बच्चों की कॉपी पर एमडीए दवा सेवन का संदेश लिखवाकर अभिभावकों से हस्ताक्षर
• निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन
• स्मार्ट क्लास के जरिए फाइलेरिया जागरूकता वीडियो दिखाना
• स्कूल नोटिस बोर्ड पर एमडीए अभियान की तिथि अंकित करना
• समुदाय जागरूकता के लिए प्रभात फेरी
• अभिभावक बैठकों में फाइलेरिया रोकथाम और एमडीए की भूमिका पर चर्चा
• बीसीसी बैठकों में BEO की सहभागिता
• स्कूलों में दवा वितरण बूथ लगाने में सहयोग
• प्रधानाध्यापक द्वारा स्वयं दवा सेवन कर बच्चों को प्रेरित करना
• यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को दवा मिड-डे मील के बाद ही खिलाई जाए
इस पूरी प्रक्रिया में पिरामल फाउंडेशन की तकनीकी एवं फील्ड स्तर पर सहयोग भी लिया जाएगा, जो शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करेगा।
फाइलेरिया मुक्त सीवान
विभाग का मानना है कि यदि बच्चे जागरूक होंगे तो पूरा परिवार जागरूक होगा। इसी सोच के साथ स्कूलों को केंद्र में रखकर यह अभियान चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से यह अभियान सफल होगा और सीवान जल्द ही फाइलेरिया मुक्त जिला बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा।

