मकर संक्रांति पर मांझी के रामघाट में कुश्ती का महासंग्राम, दंगल में पहलवानों ने दिखाया दमखम
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर मांझी के ऐतिहासिक रामघाट पर आयोजित दंगल प्रतियोगिता ने ग्रामीण खेल संस्कृति की जीवंत झलक पेश की। पारंपरिक अखाड़े में सजी इस प्रतियोगिता में दर्जनों नामचीन पहलवानों ने अपने-अपने प्रतिद्वंद्वियों को शानदार पटखनी देकर दर्शकों की जमकर वाहवाही लूटी और पुरस्कार अपने नाम किए। कुश्ती के हर मुकाबले पर हजारों की संख्या में मौजूद दर्शकों की तालियों और जयकारों से पूरा रामघाट गूंज उठा।
दंगल प्रतियोगिता का विधिवत उद्घाटन मांझी थानाध्यक्ष सह प्रशिक्षु डीएसपी देव आशीष हंस तथा ई. सौरभ सन्नी ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर विजेता पहलवानों के साथ-साथ स्थानीय पुराने और अनुभवी पहलवानों को अंगवस्त्र, नकद राशि एवं सम्मान प्रदान कर उत्साहवर्धन किया गया। उद्घाटन से पूर्व अखाड़े के संस्थापक स्वर्गीय पायेत पहलवान के पुत्र बलिराम पहलवान ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजन कर अखाड़े का ध्वजारोहण किया, जिससे वातावरण पूरी तरह सांस्कृतिक और श्रद्धामय बन गया।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने अखाड़े के गौरवशाली इतिहास, मांझी की कुश्ती परंपरा और स्थानीय पहलवानों की क्षेत्रीय पहचान को मजबूती देने में उनकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में सुनील कुमार पाण्डेय, सच्चिदानंद भारती, रामचन्द्र यादव, भरत यादव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
दंगल में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले, जिनमें गोपालनगर के बिहारी पहलवान ने रेवती के मंतोष पहलवान को, बलिया के छोटू पहलवान ने बनारस के मन्नू पहलवान को, मांझी के सूरज पहलवान ने जनता बाजार के सुनील पहलवान को, गोपालनगर के बिट्टू पहलवान ने मांझी के रंजन पहलवान को, मांझी के धनजीत पहलवान ने गाजीपुर के संदीप पहलवान को तथा मांझी के सरोज कुमार ने बकुलहाँ के रिशी कुमार को पटखनी देकर जीत दर्ज की। इसके अलावा चैनपुर के अंकुश पहलवान ने सेमरिया के कालू पहलवान को, गोपालनगर के अनिल यादव ने मांझी के विशाल यादव को, मांझी के राजेश पहलवान ने बैरिया के सन्देश पहलवान को और मरहा के नसरु पहलवान ने नटवर सेमरिया के आफताब अंसारी को पराजित किया।
महिला वर्ग की कुश्ती ने भी दर्शकों का खास ध्यान खींचा, जहां गोरखपुर की नम्रता पहलवान ने कानपुर की मुस्कान पहलवान को तथा मुस्कान पहलवान ने वाराणसी की सोनम पाण्डेय को पटखनी दी। वहीं नरला के सोनू पहलवान और गाजीपुर के संदीप पहलवान तथा मांझी के आकाश पहलवान और बकुलहा के सन्देश पहलवान के बीच मुकाबले बराबरी पर छूटे, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
कुल मिलाकर मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित यह दंगल प्रतियोगिता केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि मांझी की सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और ग्रामीण प्रतिभा का भव्य उत्सव बनकर सामने आया, जिसने आने वाली पीढ़ी को भी अखाड़े से जोड़ने का संदेश दिया।



