बेंगलुरु गैस रिसाव हादसे के शिकार युवकों के शव पहुँचे गुर्दाहा खुर्द, गांव में पसरा मातम
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: बीते शुक्रवार को बेंगलुरु में हुए दर्दनाक गैस रिसाव हादसे में असमय काल का ग्रास बने दो युवकों के शव शुक्रवार को अलग–अलग समय पर उनके पैतृक गांव गुर्दाहा खुर्द पहुँचे। पहला शव करीब ढाई बजे जबकि दूसरा शव साढ़े चार बजे गांव पहुंचा। शव वाहन के गांव में प्रवेश करते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया। मानो समय थम सा गया हो। चारों ओर चीख-पुकार, करुण रुदन और विलाप से हृदय विदारक दृश्य उत्पन्न हो गया, जिसे देख ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।
बताया जाता है कि यह हादसा 9 जनवरी को बेंगलुरु में उस समय हुआ, जब मजदूरी कर रहे युवक सुबह चाय बना रहे थे। इसी दौरान गैस रिसाव के कारण अचानक आग लग गई, जिसमें पांच युवक गंभीर रूप से झुलस गए थे। इलाज के दौरान इनमें से दो युवकों की मौत बुधवार को क्रमशः शाम और देर रात हो गई। मृतकों की पहचान गुर्दाहा खुर्द गांव निवासी मोगल मियां के पुत्र मुजफ्फर अली और मो. खलील के पुत्र अरबाज आलम के रूप में हुई है।
शव गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतकों की माताएं बार-बार बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ रही थीं, वहीं दोनों के पिता फूट-फूटकर रोते नजर आए। भाइयों, बहनों और रिश्तेदारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जिस घर में कभी हंसी-खुशी की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब केवल मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि एक जनवरी को गुर्दाहा खुर्द गांव से पांच युवक बेहतर भविष्य की तलाश में बेंगलुरु गए थे। वे मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना संजोए हुए थे, लेकिन एक भयावह गैस हादसे ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
गुरुवार को बेंगलुरु में दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद जब शव गांव लाए गए तो अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अपनों को कंधा देते समय मृतकों के मित्रों की आंखें भी छलक उठीं। हर कोई यही कहता नजर आया कि दोनों युवक बेहद मिलनसार, शांत स्वभाव और मेहनती थे।
इस दर्दनाक घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को मुआवजा, आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। बताया गया कि हादसे में झुलसे तीन अन्य मजदूर अभी भी बेंगलुरु में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस त्रासदी ने पूरे गुर्दाहा खुर्द गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है, जिसकी पीड़ा शायद लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी।

