साहित्य संसार : लेखक से बातचीत
सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. मीरा रामनिवास से राजीव कुमार झा की बातचीत
“माता-पिता से जुड़ी बचपन की मधुर यादों ने और माँ के प्यार-दुलार की कोमल अनुभूतियों ने मेरे मन को शब्द दिए हैं।”— डॉ. मीरा रामनिवास
/// जगत दर्शन न्यूज
प्रश्न: हाल में आपकी जिस पुस्तक का प्रकाशन हुआ है, उसके बारे में बताइए।
उत्तर: दिसंबर 2023 में मेरा नवीन काव्य-संग्रह “सागर को कुछ कहना है” प्रकाशित हुआ है। इस कृति में मेरी जीवन-यात्रा की अनुभूतियाँ, बचपन की मधुर स्मृतियाँ तथा सामाजिक विसंगतियों से उपजे भाव समाहित हैं।
इस संग्रह की कविताओं में बदलते सामाजिक मूल्यों से जूझता मन, भौतिक विकास की भेंट चढ़ती प्रकृति, भीख माँगते बच्चे, किसान-मजदूरों का दुःख-दर्द और सतत गतिशील सागर की व्यथा अभिव्यक्त हुई है।
प्रकृति का सौंदर्य—सूरज-चाँद की आवाजाही, पेड़-पौधे, पंछी, फूल-पत्तियाँ और ऋतुओं के विविध रूप—मुझे सदैव आकर्षित करते रहे हैं। प्रकृति का निश्चल प्रेम और उसका मौन संदेश मुझे अत्यंत प्रिय है। माता-पिता से जुड़ी बचपन की मधुर यादों और माँ के स्नेहिल दुलार ने ही मेरे भावों को शब्द प्रदान किए हैं।
“सागर को कुछ कहना है” काव्य-कृति मानवीय मूल्यों, प्रकृति-प्रेम, पंछियों के उजड़ते घर, बदलते मानवीय व्यवहार और लुप्त होते संस्कारों का सजीव दस्तावेज है। इसमें पूर्वजों की भाँति सरल मन रखने, निर्मल प्रेम करने, अपने आस-परिवेश के प्रति संवेदनशील बने रहने तथा प्रकृति और सृष्टा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश निहित है।
प्रश्न: आपने कविता और कहानी—दोनों विधाओं में लेखन किया है। साहित्य-लेखन में विधागत स्तर पर लेखक को कौन-सी बातें प्रभावित करती हैं?
उत्तर: तत्कालीन सामाजिक परिवेश लेखक को गहराई से प्रभावित करता है। समाज में रहते हुए अनेक अनुभूतियाँ मन को मथती हैं और उस पर गहरी छाप छोड़ जाती हैं। यही विसंगतियाँ, यथार्थ और संघर्ष संवेदना बनकर कविता या कहानी के रूप में कागज़ पर उभर आते हैं।
प्रश्न: वर्तमान परिवेश के यथार्थ को कहानी और कविता का रूप देते समय जीवन की किन बातों ने आपको सदैव विचलित किया है?
उत्तर: वर्तमान परिवेश ने मनुष्य को जीवन की मूल संवेदनाओं से दूर कर दिया है। भौतिकता की अंधी दौड़, संवेदनहीनता, रिश्तों में आती शिथिलता और मानवीय मूल्यों का क्षरण मुझे निरंतर विचलित करता रहा है, और यही पीड़ा मेरी रचनाओं में स्वर बनकर प्रकट होती है।

